राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए बड़े निर्णय
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के संदर्भ में आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, दोनों ने इस बैठक में भाग नहीं लिया। स्वामी गोविंद गिरी महाराज ने उनके इस्तीफे का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने स्वीकार किया। चंपत राय के करीबी लोगों का कहना है कि प्रभु श्रीराम की सेवा के लिए किसी पद पर होना आवश्यक नहीं है और वे आगे भी सेवा करते रहेंगे। इस बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और अन्य वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित थे।
बैठक में अनुशासन और नियमों का पालन
SIT रिपोर्ट पर चर्चा
बैठक के दौरान अनुशासन का पालन किया गया। गोपाल राव, जो ट्रस्टी नहीं थे, को बैठक से बाहर भेज दिया गया। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट उन्हें सौंपी थी, जिसके आधार पर बैठक में चर्चा की गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने इस घटना को करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया और व्यवस्था में खामियों को स्वीकार किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि चढ़ावे की चोरी से सभी की भावनाएं आहत हुई हैं।
नए महासचिव के लिए नामों पर चर्चा
चंपत राय के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव के लिए तीन प्रमुख नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री बजरंग बागड़, बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी कृष्णमोहन शामिल हैं। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रस्ट ने एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है।
महंत नृत्यगोपाल दास का बयान
कड़ी सजा की मांग
बैठक से पहले, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने दान चोरी की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पाप के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताया कि वे दोषियों को सजा दिलाने में मदद करेंगे, क्योंकि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है।