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राष्ट्रपति ट्रंप की नई AI नीति: सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों पर सरकारी नियंत्रण लगाने की योजना बनाई है। नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत एक उच्च स्तरीय एआई कार्य समूह का गठन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। एंथ्रोपिक कंपनी के नए मॉडल 'Mythos' के कारण यह कदम उठाया जा रहा है, जो संभावित साइबर खतरों को जन्म दे सकता है। ट्रंप का यह नया दृष्टिकोण उनके पूर्व चुनावी वादों से भिन्न है, और यह चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित करेगा।
 

दिल्ली, 05 मई

वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों पर सरकारी नियंत्रण लगाने की योजना बना रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस एक नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर कार्य कर रहा है, जिसके तहत एक उच्च स्तरीय एआई कार्य समूह का गठन किया जाएगा। यह समूह यह सुनिश्चित करेगा कि नए और शक्तिशाली एआई मॉडल्स देश की सुरक्षा के लिए खतरा न बनें।


एंथ्रोपिक के नए मॉडल से चिंता

सरकार की इस सख्ती का मुख्य कारण एंथ्रोपिक कंपनी का नया एआई मॉडल 'Mythos' है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस मॉडल की उन्नत कोडिंग क्षमता जटिल साइबर हमलों को अंजाम देने में सक्षम है। यह मॉडल सिस्टम की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें मिनटों में निशाना बना सकता है, जो अमेरिकी बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।


नीति में बदलाव के निहितार्थ

राष्ट्रपति ट्रंप का यह नया दृष्टिकोण उनके पूर्व चुनावी वादों और निर्णयों से भिन्न है। पद ग्रहण करने के बाद, उन्होंने जो बाइडन के 2023 के सख्त एआई सुरक्षा आदेश को रद्द कर दिया था, जिसे अब सुरक्षा कारणों से नए रूप में पुनः लाया जा रहा है। पहले ट्रंप ने एआई क्षेत्र में कम हस्तक्षेप की बात की थी, लेकिन अब सुरक्षा और साइबर खतरों ने प्रशासन को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है।


चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा

व्हाइट हाउस ने कांग्रेस के समक्ष एक व्यापक एआई नीति का प्रस्ताव भी रखा है। इसमें राज्यों के अलग-अलग नियमों को समाप्त करने और राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत कानून बनाने की सिफारिश की गई है। सरकार का उद्देश्य एआई के माध्यम से ऊर्जा खर्च को नियंत्रित करना और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन अभी भी चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाए रखने के लिए एआई निर्यात को बढ़ावा देने का पक्षधर है।


जनता और टेक कंपनियों पर प्रभाव

इस नए नियमन का सीधा असर बड़ी टेक कंपनियों के कार्यों पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने एआई सिस्टम के सुरक्षा परीक्षण के परिणाम सरकार के साथ साझा करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी निगरानी बढ़ने से एआई के गलत इस्तेमाल और डेटा चोरी जैसी घटनाओं पर नियंत्रण लगेगा। व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस योजना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मसौदा तैयार हो चुका है।


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