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राहुल गांधी का आरएसएस पर नया हमला, राम माधव के बयान को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर एक बार फिर हमला बोला है, इस बार राम माधव के अमेरिका में दिए गए बयान को लेकर। उन्होंने संघ को 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ' करार दिया और कहा कि राम माधव ने संघ का असली चेहरा उजागर किया है। इस बयान के बाद, राम माधव ने माफी भी मांगी है। जानें इस राजनीतिक विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के तर्क।
 

राहुल गांधी का आरएसएस पर आरोप

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर लगातार हमले जारी रखे हैं। वह संसद से लेकर सड़कों तक संघ के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। इस संदर्भ में, उन्होंने संघ के नेता राम माधव के अमेरिका में दिए गए एक बयान पर प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने कहा कि यह संगठन वास्तव में 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ' है और राम माधव ने इसे बेनकाब कर दिया है।


राम माधव का विवादास्पद बयान

राम माधव ने अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, और विपक्ष की आलोचना के बावजूद रूस से तेल खरीदना बंद करने पर भी सहमति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने बिना किसी विरोध के 50 प्रतिशत टैरिफ पर सहमति दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अमेरिका के साथ सहयोग करने में कोई कमी नहीं कर रहा है।


सोशल मीडिया पर राहुल का बयान

राहुल गांधी ने राम माधव के बयान पर एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद, अमेरिका में शुद्ध गुलामी।' उन्होंने यह भी कहा कि राम माधव ने संघ का असली चेहरा उजागर कर दिया है। इस बयान के बाद विपक्ष ने राम माधव की आलोचना शुरू कर दी है और कांग्रेस पार्टी लगातार उन पर हमले कर रही है।


राम माधव ने मांगी माफी

राम माधव के बयान के बाद भारत में विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'मोदी और उनकी सरकार के सरेंडर की कहानी बीजेपी के सीनियर नेता राम माधव बता रहे हैं। यह स्पष्ट है कि मोदी वही करते हैं, जो ट्रंप चाहते हैं।' इसके बाद, राम माधव ने अपने बयान पर माफी मांगी, यह कहते हुए कि उन्होंने जो कहा, वह गलत था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने रूस से तेल का आयात रोकने पर कभी सहमति नहीं दी और 50 प्रतिशत टैरिफ का विरोध भी किया था।