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राहुल गांधी का सड़कों पर संघर्ष: कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा

राहुल गांधी ने 6 अक्टूबर से दिल्ली की सड़कों पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। उनके साथ 'इंडिया' गठबंधन की कई पार्टियां और सैकड़ों सांसद शामिल हैं। इस आंदोलन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया है। राहुल गांधी की सक्रियता और स्पष्ट रुख ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया है। वे सड़कों पर बने रहने का संकल्प लिए हुए हैं।
 

राहुल गांधी का आंदोलन

कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 6 अक्टूबर से दिल्ली की सड़कों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर प्रदर्शन शुरू किया है। उनके साथ 'इंडिया' गठबंधन की लगभग एक दर्जन पार्टियों के सैकड़ों सांसद भी शामिल हैं। इस समय सेंट्रल दिल्ली एक राजनीतिक केंद्र बन गई है। राहुल गांधी की नई 'सड़क पर संघर्ष' की रणनीति ने कांग्रेस, एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया है.


कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उत्साह और जोश से न केवल पार्टी नेतृत्व खुश है, बल्कि राहुल गांधी की सक्रियता ने कार्यकर्ताओं में नई उमंग भर दी है। कार्यकर्ताओं के जोशीले नारों ने राहुल गांधी को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया।


कनॉट प्लेस में प्रदर्शन

गुरुवार को राहुल गांधी कनॉट प्लेस के Moets रेस्टोरेंट में विपक्षी सांसदों के साथ लंच के लिए पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए। इस दौरान उन्होंने 'देश का पीएम कैसे हो, राहुल गांधी जैसा हो... देश की आंधी, राहुल गांधी' जैसे नारे लगाए।


'सड़क पर आंदोलन जारी रहेगा'

राहुल गांधी की सक्रियता पर NSUI कार्यकर्ता महफूज अहमद ने कहा, 'कांग्रेस हमेशा से सक्रिय रही है। मीडिया हमारे प्रदर्शनों को नहीं दिखाती, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। नीट पेपर लीक मामले में एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और पार्टी के सीनियर नेताओं ने प्रदर्शन किया था। 2 अक्टूबर से हम ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। जब तक उनका इस्तीफा नहीं होगा, हम सड़कों पर बने रहेंगे। अपने नेता राहुल गांधी के साथ खड़े रहेंगे।'


राहुल गांधी का स्पष्ट रुख

कांग्रेस 2013 से दिल्ली और 2014 से केंद्र की सत्ता में नहीं है। यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने पहले भी भारत जोड़ो यात्रा की और नीट पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि, पहले के अधिकांश आंदोलन सीमित थे। अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनका आंदोलन व्यापक असर दिखा रहा है। राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं है। इस स्पष्ट रुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है।