राहुल गांधी ने आदिवासी अधिकारों के लिए उठाई आवाज़, केन-बेतवा परियोजना पर जताया विरोध
राहुल गांधी का आदिवासी भाई-बहनों के समर्थन में बयान
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक पोस्ट में केन-बेतवा परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय की ज़मीन के हनन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन भाई-बहनों को न तो उचित मुआवज़ा मिला है और न ही सम्मानजनक पुनर्वास। इसके विरोध में आदिवासी समुदाय ने जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल का सहारा लिया, लेकिन पुलिस ने उन्हें बलात हटा दिया।
राहुल गांधी ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि मोदी सरकार सत्य और सत्याग्रह से भयभीत है। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय ने अपनी ज़मीन खो दी है, और इसके लिए उन्हें न तो न्याय मिला है और न ही उचित पुनर्वास।
सत्य और सत्याग्रह – दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले… pic.twitter.com/NaWDN1bVR0
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 27, 2026
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समुदाय देश के प्राकृतिक संसाधनों के पहले मालिक हैं, और उनका हक़ जल, जंगल और ज़मीन पर है। उनका सत्याग्रह इसीलिए है क्योंकि यह हक़ उनसे छीना जा रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें जीने के लिए उचित सहारा दिया जाए, अन्यथा जीवन तो चिता के समान हो जाएगा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल का उपयोग कर उनके शांतिपूर्ण विरोध को दबा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ खड़े रहेंगे और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।