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राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों के कार्यक्रम में शिक्षा पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शिक्षा के मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कैसे UPA सरकार के समय शिक्षा के लिए बजट का 4.6% आवंटित किया जाता था, जो अब घटकर 2.6% रह गया है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे देश में फैली हिंसा और नफरत को समाप्त करने में मदद करें। कार्यक्रम में रायसेन जिले के सूरज ठाकुर ने भी आदिवासी युवाओं की नौकरी के मुद्दे पर सवाल उठाए।
 

छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी का संबोधन


इंदौर। कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि, हम चाहते हैं कि छात्रों की टूटी हुई उम्मीदें फिर से जागृत हों और वे शिक्षा तथा प्रणाली पर विश्वास करना शुरू करें। छात्रों को अपनी ताकत - जिज्ञासा, ईमानदारी, करुणा, प्रेम और स्नेह - के माध्यम से देश को आगे बढ़ाना चाहिए। वर्तमान में देश में जो हिंसा और नफरत फैलाई जा रही है, उसे केवल छात्र ही समाप्त कर सकते हैं, अंधभक्त नहीं। हम एक ऐसे हिंदुस्तान की कामना करते हैं जो छात्रों का हो, न कि अंधभक्तों का।


उन्होंने आगे कहा कि, शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन आज इसे कमजोर किया जा रहा है। UPA सरकार के दौरान बजट का 4.6% शिक्षा पर खर्च होता था, जिसे अब घटाकर 2.6% कर दिया गया है। पिछले एक दशक में 1.5 करोड़ छात्रवृत्तियाँ समाप्त की गई हैं। वर्तमान में भारत में 10 लाख शिक्षकों की पदस्थापनाएँ खाली हैं।


देश में शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन आज शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है।

⦿ UPA सरकार में बजट का 4.6% शिक्षा में जाता था, जिसे अब 2.6% कर दिया गया है

⦿ पिछले 10 साल में 1.5 करोड़ स्कॉलरशिप छीन ली गई है

⦿ आज हिंदुस्तान में 10 लाख टीचरों की पोस्ट खाली पड़ी है

:… pic.twitter.com/pQCDgUoe0L

— Congress (@INCIndia) September 19, 2026



इस कार्यक्रम के दौरान, रायसेन जिले के सूरज ठाकुर ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी। सूरज ने कहा कि, 2022 में मध्य प्रदेश में सिविल जज की वैकेंसी आई थी, जिसमें आदिवासी उम्मीदवारों के लिए 121 पद थे। लेकिन भाजपा सरकार ने एक भी पद पर आदिवासी युवा को नौकरी नहीं दी। क्या उन्हें एक भी युवक जज बनने के योग्य नहीं दिखा? वास्तव में, भाजपा सरकार नहीं चाहती कि कोई भी आदिवासी सिविल जज बने और सिस्टम में आए।