राहुल गांधी ने भोपाल में किसानों के मुद्दों पर उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस किसान महाचौपाल में राहुल गांधी का संबोधन
भोपाल। कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'कांग्रेस किसान महाचौपाल' में एक जनसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद पहले बोलने का अधिकार लोकसभा के नेता विपक्ष का होता है। लेकिन यह पहली बार हुआ है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि, उन्होंने संसद में पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब पर चर्चा करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। नरवणे ने अपनी किताब में उल्लेख किया है कि चीन के टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे। जब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया, तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
दो घंटे बाद, नरवणे ने फिर से राजनाथ सिंह को फोन किया और कहा कि उन्हें पीएम मोदी से बात करने की आवश्यकता है। राजनाथ सिंह ने पीएम मोदी से बात की, लेकिन मोदी ने बिना नरवणे से बात किए कहा कि, 'जो उचित समझो, वो करो'। नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि उस दिन सरकार और प्रधानमंत्री ने उन्हें और सेना को अकेला छोड़ दिया।
राहुल गांधी ने अमेरिकी ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, चार महीने से अमेरिका के साथ ट्रेड डील रुकी हुई थी, लेकिन मोदी ने इसे केवल दो कारणों से साइन किया। पहला, अमेरिका में लाखों Epstein फाइलें हैं जो अभी तक रिलीज नहीं हुई हैं। दूसरा, अडानी पर अमेरिका में चल रहा क्रिमिनल केस है। उन्होंने कहा कि, अडानी, बीजेपी और मोदी का वित्तीय ढांचा हैं, इसलिए यह मामला मोदी और बीजेपी पर भी है।
राहुल ने चुनौती दी कि, अगर मोदी में हिम्मत है तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करें। उन्होंने कहा कि, अमेरिका बांग्लादेश को टेक्सटाइल में 0% टैरिफ देने की बात कर रहा है, जबकि भारत को कपास खरीदने पर टैरिफ नहीं मिलेगा। इससे भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि, 21वीं सदी में डेटा सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के पास सबसे अधिक डेटा है, लेकिन मोदी ने इस डील के जरिए भारत का डेटा अमेरिका को सौंप दिया है। इससे किसानों और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा।
राहुल ने कहा कि, अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रंप कहता है कि भारत हर साल 9 लाख करोड़ रुपए का सामान अमेरिका से खरीदेगा। सवाल यह है कि, हमारी इंडस्ट्री और किसानों का क्या होगा? इस डील में भारत को अधिक टैक्स देना होगा, जबकि पहले कम टैक्स दिया जाता था।