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रिजू दत्ता ने अजयपाल शर्मा से मांगी माफी, टीएमसी में निलंबन का सामना

रिजू दत्ता, जो तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता हैं, ने आईपीएस अजयपाल शर्मा से माफी मांगी है। चुनाव के दौरान उनके द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान के बाद उन्हें पार्टी द्वारा निलंबित कर दिया गया। दत्ता ने एक वीडियो में कहा कि उनका बयान पार्टी के प्रवक्ता के रूप में था और उन्होंने बीजेपी के गुस्से का सामना किया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और रिजू दत्ता के बयान के पीछे की सच्चाई।
 

रिजू दत्ता की माफी और टीएमसी का निलंबन


उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा को पश्चिम बंगाल ले जाने की धमकी देने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निलंबित प्रवक्ता रिजू दत्ता ने माफी मांगी है। चुनाव के दौरान अजयपाल शर्मा की सख्त कार्यशैली के कारण वे टीएमसी के निशाने पर रहे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उनके यूपी से खींचकर ले जाने की बातें होने लगीं। हाल ही में, रिजू दत्ता ने एक वीडियो जारी कर अजयपाल शर्मा से माफी मांगी और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने बीजेपी को पश्चिम बंगाल में बंपर जीत के लिए भी बधाई दी।


टीएमसी द्वारा निलंबन की कार्रवाई

चुनाव परिणामों के बाद टीएमसी ने अपने तीन प्रवक्ताओं को अनुशासन उल्लंघन के आरोप में छह साल के लिए निलंबित कर दिया है, जिनमें रिजू दत्ता का नाम भी शामिल है। इस कार्रवाई के बाद, उन्होंने अजयपाल शर्मा के खिलाफ दिए गए विवादास्पद बयान के लिए माफी मांगी। दत्ता ने कहा, "मेरा बयान पार्टी के प्रवक्ता के रूप में था, व्यक्तिगत रूप से अजयपाल शर्मा से मेरी कोई दुश्मनी नहीं है। मैं उनके लिए माफी मांगता हूं।"


रिजू दत्ता का वीडियो बयान

रिजू दत्ता ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने टीएमसी के प्रवक्ता के रूप में अजयपाल शर्मा पर एक वीडियो बनाया था। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने उन्हें सच बोलने के कारण निलंबित कर दिया है। दत्ता ने कहा कि उनके बयान के कारण बीजेपी का गुस्सा उन पर फूट रहा है, जबकि वह बयान केवल पार्टी प्रवक्ता के रूप में दिया गया था।




रिजू दत्ता का विवादास्पद बयान

बंगाल चुनाव के दौरान, रिजू दत्ता ने कहा था कि बीजेपी भी आईपीएस अजयपाल शर्मा को नहीं बचा पाएगी और चुनाव के बाद उन्हें यूपी से खींचकर लाएंगे। अब उन्होंने कहा है कि वह अजयपाल शर्मा से बिना किसी शर्त माफी मांगते हैं, यह सलाह यूपी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की थी।