री-नीट परीक्षा से जुड़े साइबर धोखाधड़ी का खुलासा, दो गिरफ्तार
नई दिल्ली में साइबर धोखाधड़ी का मामला
नई दिल्ली: री-नीट परीक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का फायदा उठाते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों को ठगने वाले एक साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षा के प्रश्नपत्र और गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह मामला प्रश्नपत्र लीक का नहीं, बल्कि साइबर धोखाधड़ी का है।
साइबर धोखाधड़ी का तरीका
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में यह सामने आया कि कुछ लोग टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया समूहों के जरिए री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झूठा दावा कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें कई डिजिटल सुराग मिले, जिनके आधार पर आरोपियों की पहचान की गई।
छात्रों को ठगने की रणनीति
पुलिस के अनुसार, आरोपी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों को विज्ञापनों, संदेशों और ऑनलाइन पोस्ट के माध्यम से प्रभावित करते थे। वे यह दावा करते थे कि उनके पास परीक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी है। विश्वास जीतने के बाद, वे प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे मांगते थे और भुगतान मिलने के बाद संपर्क समाप्त कर देते थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
जांच के दौरान, पुलिस ने राजस्थान के जयपुर और कोटा से सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों विभिन्न टेलीग्राम चैनलों का संचालन कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को धोखा दिया गया और आर्थिक लाभ कमाया गया।
बैंक खातों और वेबसाइटों की जांच
साइबर क्राइम ब्रांच को आरोपियों से जुड़े छह बैंक खातों और कई डिजिटल माध्यमों की जानकारी मिली है। जांच में 44 वेबसाइटों और कई टेलीग्राम समूहों का भी पता चला है। पुलिस का आरोप है कि इन माध्यमों का उपयोग न केवल परीक्षा से जुड़ी ठगी बल्कि निवेश संबंधी धोखाधड़ी के लिए भी किया जाता था।
जांच का दायरा बढ़ा
संयुक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंघल ने स्पष्ट किया कि री-नीट प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने केवल झूठे दावे कर लोगों को ठगा। पुलिस अब राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।