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रूस में बच्चों के लिए अनोखा सैन्य प्रशिक्षण कैंप

रूस में हाल ही में आयोजित एक सैन्य कैंप ने बच्चों को अनुशासन और प्रशिक्षण का अनोखा अनुभव दिया। इस कैंप में 8 से 17 साल के बच्चों ने भाग लिया, जहां उन्हें फौजी अंदाज में प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि, इस गतिविधि पर कई आलोचनाएं भी उठी हैं, जिसमें बच्चों को युद्ध की मानसिकता से जोड़ने का आरोप लगाया गया है। जानें इस कैंप के पीछे की कहानी और बच्चों की राय।
 

सैन्य कैंप का अनोखा अनुभव

छुट्टियों के दौरान आयोजित कैंप आमतौर पर बच्चों के लिए मनोरंजन और रोमांच का साधन होते हैं, लेकिन रूस में हाल ही में आयोजित एक कैंप ने एक अलग ही दिशा ली। डॉन नदी के किनारे स्थित इस कैंप में बच्चों को खेल-खेल में नहीं, बल्कि सैनिकों की तरह अनुशासन और प्रशिक्षण दिया गया। इस फौजी प्रशिक्षण ने बच्चों के लिए रोमांचक अनुभव तो प्रदान किया, लेकिन इसके पीछे छिपे संदेश पर भी बहस छिड़ गई है।


कैंप में भाग लेने वाले बच्चे

इस कैंप में 8 से 17 साल के बीच के 83 बच्चे शामिल हुए। ये बच्चे फौजी अंदाज में दौड़ते और रेंगते हुए नजर आए। कुछ ने कैमोफ्लॉज यूनिफॉर्म पहना था, जबकि अन्य के हाथ में असली या खिलौने के हथियार थे। उन्हें shallow पानी और रेत पर रेंगते हुए बाधाओं को पार करना पड़ा। इस प्रशिक्षण को देने वाले सैन्यकर्मी वही थे जिन्होंने यूक्रेन युद्ध में भाग लिया था।


बच्चों की राय

ट्रेनिंग को लेकर बच्चों ने क्या कहा?


सबसे छोटे प्रतिभागी, 8 वर्षीय इवान ग्लुशचेंको ने बताया कि उसके लिए सबसे यादगार पल नकली गोलियां चलाना और ग्रेनेड फेंकना था। वहीं, एक बड़े कैडेट एंटन ने कहा कि वह भविष्य में सेना में शामिल होना चाहता है और देश की सेवा करना चाहता है। एक अन्य किशोर डेविड ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उसकी इच्छाशक्ति को परखने का मौका दिया और उसने अपनी मजबूती को महसूस किया।


विवादास्पद प्रशिक्षण

बच्चों की ट्रेनिंग पर हो रहा विवाद


बच्चों को इस प्रकार की सैन्य ट्रेनिंग देने पर कई आलोचक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। स्वतंत्र बच्चों के अधिकार संगठन 'ने नॉरमा' का कहना है कि यह बच्चों को युद्ध की मानसिकता से जोड़ने और उन्हें प्रचार का हिस्सा बनाने जैसा है। उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में हथियारों की ट्रेनिंग बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, रूसी प्रशासन का दावा है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और एकजुटता की भावना पैदा करती हैं।


प्रशिक्षकों का दृष्टिकोण

सैनिकों और प्रशिक्षकों का क्या है नजरिया?


इस प्रशिक्षण में शामिल एक प्रशिक्षक अलेक्जेंडर शोपिन, जो खुद यूक्रेन युद्ध में घायल हुए हैं, ने कहा कि उन्हें बच्चों को अपना अनुभव बांटने में खुशी मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह देखना अच्छा लगता है कि कैसे बच्चे एक टीम की तरह काम करना सीखते हैं। वहीं, एक अन्य प्रशिक्षक व्लादिमीर यानेन्को ने कहा कि यह ट्रेनिंग बच्चों को न केवल मजबूत बनाती है, बल्कि उन्हें जीवन में अनुशासन और देशप्रेम का महत्व भी सिखाती है।