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रूस में भारतीय युवाओं की बढ़ती मौतें: एक गंभीर चिंता

रूस में भारतीय युवाओं की बढ़ती मौतों की घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। हाल ही में हरियाणा के एक युवक का शव लौटने के बाद, यह स्पष्ट हुआ है कि कई युवा युद्ध में फंसे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 13 युवाओं की जान जा चुकी है, जबकि 26 अभी भी लापता हैं। जानें कैसे ये युवा रूस पहुंचे और उनकी दुखद कहानियां क्या हैं।
 

रूस में भारतीयों की नौकरी की तलाश

रूसी कंपनियां, विशेषकर मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में, भारतीय नागरिकों को रोजगार देने में रुचि दिखा रही हैं। रूस में भारतीय समुदाय की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत से रूस जाने वाले लोगों में छात्र, पेशेवर और श्रमिक शामिल हैं, जो विभिन्न प्रकार की नौकरियों में लगे हुए हैं। हालांकि, कई युवा सुनहरे भविष्य की तलाश में रूस गए थे, लेकिन अब उनकी लाशें भारत लौट रही हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें रूस में सैनिक बनाकर युद्ध में भेजा गया।


हरियाणा के युवक की दुखद कहानी

हाल ही में हरियाणा के रेवाड़ी जिले से एक युवक का शव रूस से लाया गया। अंशु नामक यह युवक पढ़ाई के लिए रूस गया था और अगस्त 2024 में उसने रूस की सेना में भर्ती हो गया। 14 अक्टूबर 2025 को युद्ध के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। अब छह महीने बाद उसका शव भारत लाया गया है। अंशु ने अपने परिवार को बताया था कि वह वहां बुरी स्थिति में फंस गया था, जिसके बाद उसका परिवार से संपर्क टूट गया।


13 युवाओं की जान गई

एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 13 युवाओं की जान जा चुकी है, जिनमें से 9 हरियाणा से हैं। इसके अलावा, पंजाब से 2, राजस्थान से 1 और जम्मू-कश्मीर से भी एक युवक शामिल है। इनमें से अधिकांश के शव मिल चुके हैं।


लापता युवाओं की संख्या

रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीयों में से 26 युवा अभी भी लापता हैं, जिनमें से अधिकांश हरियाणा के हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण, रूस ने अगस्त 2024 में लगभग 110 भारतीय युवाओं को सेना में शामिल किया था। इनमें से 98 युवाओं को सरकार ने वापस लाया, जबकि 12 की युद्ध में मृत्यु हो गई। सरकार ने भारतीय युवाओं की सेना में भर्ती पर रोक लगाने की सलाह जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद भर्ती जारी है।


रूस में फंसे युवाओं की कहानियां

जो युवा रूस की सेना में फंसे हैं, उनकी कहानियां भिन्न हैं। करनाल के एक व्यक्ति ने बताया कि वह जर्मनी जाने के लिए निकला था, लेकिन एजेंट ने उसे रूस में रोक दिया। दो दिन कहकर उसे दो महीने तक वहां रखा गया। बाद में, उसे बेलारूस भेजने के नाम पर निकाला गया, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आंखों पर पट्टी बांधकर 10 दिन तक जेल में रखा गया और फिर धमकी देकर आर्मी में भर्ती का कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया।


सुरक्षा गार्ड से सैनिक बनने की कहानी

जिन युवाओं को आर्मी में भर्ती किया गया है, उनमें से अधिकांश ऐसे हैं जो पढ़ाई के लिए रूस गए थे, लेकिन किसी कारणवश वहीं रह गए। हरियाणा का सोनू पढ़ाई के लिए स्टडी वीजा पर गया था। जब उसका वीजा समाप्त हुआ, तो उसने सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करना शुरू किया ताकि वीजा का समय बढ़ सके। बाद में उसे पता चला कि उसे सुरक्षा गार्ड कहकर आर्मी में भर्ती कर लिया गया। अब उसका शव भारत लौट आया है।