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रेलवे ने बेडरोल चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई

भारतीय रेलवे ने ट्रेन के एसी कोच में बेडरोल चोरी को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की योजना बनाई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नए सुधारों की घोषणा की है, जिसमें माल ढुलाई और वैगन डिजाइन में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा, अनाज और राख के सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। रेलवे की परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए श्रमिकों के लिए सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। जानें इन सुधारों के बारे में विस्तार से।
 

नई दिल्ली में रेलवे के नए सुधार

नई दिल्ली: यदि आप ट्रेन के एसी कोच में यात्रा करते हैं और तौलिया या चादर अपने साथ ले जाने का विचार कर रहे हैं, तो आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है। भारतीय रेलवे अब ट्रेनों से चोरी होने वाले बेडरोल के खिलाफ कठोर कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि अगले दो महीनों में तौलिया, बेडशीट और कंबल की चोरी को रोकने के लिए एक सख्त प्रणाली लागू की जाएगी। हाल ही में एक आरटीआई से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच ट्रेनों से 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हो चुके हैं। इस बड़े नुकसान को देखते हुए रेलवे अब इस पर कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है।


माल ढुलाई और वैगन डिजाइन में बदलाव


चोरी रोकने के उपायों के अलावा, रेल मंत्री ने रेलवे को और अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए 8 नए सुधारों की घोषणा की है। अब माल ढुलाई और वैगन डिजाइन के लिए निजी कंपनियों को अधिक सुविधाएं दी गई हैं। नए नियमों के अनुसार, कोई भी उद्योग या कंपनी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार वैगन का डिजाइन तैयार कर सकेगी, जिसे सुरक्षा मानकों पर परीक्षण के बाद आरडीएसओ से मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही, तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई के लिए कंपनियां अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विशेष टैंक वैगन डिजाइन कर सकती हैं।


अनाज और राख का सुरक्षित परिवहन


पर्यावरण संरक्षण और अनाज की सुरक्षा के लिए रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली लाखों टन फ्लाई ऐश (राख) को अब विशेष बंद वैगनों में ले जाया जाएगा ताकि यह उड़ न सके और प्रदूषण न फैलाए। इसके अलावा, पारंपरिक ढुलाई में बर्बाद होने वाले चार से पांच प्रतिशत अनाज और दालों को बचाने के लिए अब इनका परिवहन सुरक्षित कंटेनरों में किया जाएगा। उर्वरकों की ढुलाई को सरल बनाने के लिए मालभाड़ा अब 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' के आधार पर तय किया जाएगा और कंटेनर संचालन के लिए अगले बीस वर्षों के लिए एक 'यूनिफाइड लाइसेंस' प्रणाली लागू की जाएगी।


डिजिटल भूमि अधिग्रहण और श्रमिकों के लिए सर्टिफिकेशन


रेलवे की परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए अब साइट पर काम करने वाले सभी श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए 'रेलवे स्किल सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क' अनिवार्य किया गया है, ताकि केवल प्रशिक्षित और कुशल लोग ही काम कर सकें। निर्माण कार्यों और ठेकेदारी नियमों में बड़े बदलाव करते हुए रेलवे ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाने के लिए 'रेल भूमि वेब पोर्टल' की शुरुआत की है। इससे न केवल कागजी झंझट खत्म होगा, बल्कि ठेकेदारों के बिल और मुआवजा वितरण की रियल-टाइम निगरानी भी संभव होगी। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में लागू किए जा रहे इन सभी सुधारों का मुख्य उद्देश्य रेलवे की सुरक्षा, दक्षता और पारदर्शिता को एक नए स्तर पर ले जाना है।