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रेस्तरां में सर्विस चार्ज पर सीसीपीए की सख्ती, ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने बिना ग्राहक की अनुमति के सर्विस चार्ज वसूलने वाले 41 रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई की है। सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने बताया कि उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। चायोस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जानें सीसीपीए की गाइडलाइंस और ग्राहकों के अधिकारों के बारे में।
 

सर्विस चार्ज पर कार्रवाई का नया अध्याय


रेस्तरां के बिल में बिना ग्राहक की सहमति के जोड़ा जाने वाला सर्विस चार्ज अब होटल और रेस्तरां संचालकों के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई प्रतिष्ठान ग्राहकों की अनुमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे, जिसे प्राधिकरण ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना है।


शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया

सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने बताया कि यदि कोई होटल या रेस्तरां बिना सहमति के सर्विस चार्ज वसूलता है, तो उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के आदेश

प्राधिकरण ने चायोस (सनशाइन टीहाउस प्राइवेट लिमिटेड) पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, ग्राहक से वसूला गया सर्विस चार्ज लौटाने और सभी आउटलेट्स की बिलिंग प्रणाली में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, कैफे ब्लू बाटल (पटना), चाइना गेट रेस्टोरेंट, बार्बेक्यू नेशन, एफओओ अहमदाबाद, एलओपेरा फ्रेंच बेकरी और जोर्रो द लग्जरी नाइट क्लब सहित कई अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए गए हैं। अन्य मामलों की जांच अभी भी जारी है।


CCPA की गाइडलाइन का महत्व

सीसीपीए की 2022 की गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी होटल या रेस्तरां ग्राहक की अनुमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता। इसे किसी अन्य नाम से भी अनिवार्य रूप से नहीं वसूला जा सकता। सर्विस चार्ज पूरी तरह से स्वैच्छिक है और इसे देना या न देना ग्राहक का अधिकार है। केवल सर्विस चार्ज नहीं देने के आधार पर किसी ग्राहक को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि 28 मार्च 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सीसीपीए की इन गाइडलाइनों को वैध ठहराते हुए अनिवार्य सर्विस चार्ज वसूली को कानून के विरुद्ध माना था।