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रॉबर्ट वाड्रा की कानूनी मुश्किलें बढ़ीं: शिकोहपुर भूमि घोटाले में समन जारी

गुरुग्राम के शिकोहपुर भूमि सौदे में रॉबर्ट वाड्रा की कानूनी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर विचार करते हुए वाड्रा समेत आठ आरोपियों को समन जारी किया है। यह मामला 2008 में हुई भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं। वाड्रा के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है, लेकिन अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने का निर्णय बरकरार रखा। अब सभी की नजरें 16 मई की अगली सुनवाई पर हैं।
 

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई


गुरुग्राम के शिकोहपुर भूमि सौदे से जुड़े कथित घोटाले में रियल एस्टेट व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा की कानूनी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट पर विचार करते हुए वाड्रा सहित आठ आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 16 मई 2026 को पेश होने का आदेश दिया है, जिससे यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है.


भूमि सौदे का विवरण

यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम में शिकोहपुर गांव में 2008 में हुई 3.53 एकड़ भूमि की खरीद-फरोख्त से संबंधित है। जांच एजेंसी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने इस भूमि को लगभग 7.5 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद, इस भूमि को ऊंचे दाम पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया गया। ईडी का आरोप है कि इस डील में कई अनियमितताएं हुईं, जिनमें फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, भुगतान में गड़बड़ियां और स्टांप ड्यूटी में हेरफेर शामिल हैं.


मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

जांच एजेंसी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताते हुए कहा है कि अवैध रूप से अर्जित धन का उपयोग विभिन्न संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया। ईडी के अनुसार, इस मामले में अब तक 43 अचल संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है, जो संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी हैं.


वाड्रा के वकील की दलीलें

सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक मूल अपराध साबित नहीं होता, तब तक पीएमएलए के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस आधार पर उन्होंने कोर्ट से ईडी की चार्जशीट को खारिज करने की मांग की। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और चार्जशीट पर संज्ञान लेने का निर्णय बरकरार रखा.


अगली सुनवाई की प्रतीक्षा

ईडी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई मूल एफआईआर अब भी प्रभावी है और इसे रद्द नहीं किया गया है। ऐसे में प्रेडिकेट ऑफेंस मौजूद माना जाएगा और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। एजेंसी ने यह भी बताया कि इस मामले में 17 जुलाई 2025 को पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसके आधार पर अब अदालत ने आगे की कार्रवाई शुरू की है.


इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें 16 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय होगी.