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लखनऊ अग्निकांड के बाद अवैध कॉम्प्लेक्स का ध्वस्तीकरण 7 जुलाई को

लखनऊ के अलीगंज में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद, लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अवैध कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और 7 जुलाई को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया। इस दौरान अन्य अवैध निर्माणों की भी पहचान की गई है। जानें इस मामले में और क्या कार्रवाई की जा रही है।
 

अग्निकांड के बाद की कार्रवाई

लखनऊ : अलीगंज में सोमवार को हुए भयंकर अग्निकांड में 15 लोगों की जान जाने के बाद, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अवैध कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार को एलडीए की एक पांच सदस्यीय जांच समिति ने घटनास्थल का दौरा किया और भवन का निरीक्षण किया। इसके साथ ही, अग्निकांड से संबंधित तस्वीरों के साथ एक नया नोटिस भी भवन पर चस्पा किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि 7 जुलाई को भवन का ध्वस्तीकरण किया जाएगा।


अवैध निर्माण की पहचान

जांच के दौरान, अलीगंज के सेक्टर-डी में वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल और सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल की एक अन्य संपत्ति भी चिन्हित की गई है। इस आवासीय भवन में बेसमेंट से लेकर तीसरी मंजिल तक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। बताया गया है कि इस भवन में छह महीने पहले भी आग लग चुकी थी। एलडीए की टीम अब इसके दस्तावेजों की जांच कर रही है।


नए नोटिस का विवरण

अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में बनी समिति ने मंगलवार को सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102 के अभिलेखों की जांच की। इसके बाद नया नोटिस जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि 185 वर्गमीटर के आवासीय भूखंड पर स्वीकृत मानचित्र की शर्तों का उल्लंघन करते हुए बेसमेंट, भूतल, प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल का निर्माण किया गया है। पिछले 10 वर्षों से इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।


निर्माण की अनुमति का अभाव

एलडीए के अनुसार, निर्माण से संबंधित मानचित्र और अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। विहित प्राधिकारी अजीत कुमार द्वारा जारी नोटिस में बिना अनुमति के किए गए निर्माण पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने का भी उल्लेख किया गया है।


ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया

एलडीए अधिकारियों ने बताया कि 23 जून को जारी नोटिस की अवधि 7 जुलाई की सुबह समाप्त होगी। इसके बाद उसी दिन भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।


एसआईटी के समक्ष एलडीए टीम

घटनास्थल की जांच के बाद, एलडीए की आंतरिक टीम शासन द्वारा गठित एसआईटी के समक्ष पेश हुई। एसआईटी ने वर्ष 2016 में जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को बाद में निरस्त किए जाने के कारणों पर सवाल उठाए। टीम ने बताया कि उस समय भवन के व्यावसायिक उपयोग का स्पष्ट खाका उपलब्ध नहीं था।


अवैध कॉम्प्लेक्स की और जांच

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल और सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल के नाम पर सेक्टर-डी स्थित एल-3/79 पते पर एक अन्य अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स भी संचालित है। इस भवन में छह महीने पहले आग लग चुकी है। वर्तमान में इसके बेसमेंट में ब्यूटी पार्लर संचालित हो रहा है। एलडीए इस भवन से जुड़े अभिलेखों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार तक इस परिसर पर भी नोटिस चस्पा कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।