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लखनऊ अग्निकांड: क्या है इस त्रासदी के पीछे का रहस्य?

लखनऊ के अलीगंज में एक भीषण अग्निकांड ने 15 लोगों की जान ले ली, जिनमें अधिकांश एनीमेशन सेंटर के छात्र थे। इस घटना के बाद, सरकारी दस्तावेजों से पता चला है कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध निर्माण के कारण 2016 में ध्वस्त होने वाली थी। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जैसे कि मालिकाना हक में बार-बार बदलाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी। प्रदेश के मंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटना के पीछे की पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें।
 

भीषण अग्निकांड ने लखनऊ को झकझोर दिया


उत्तर प्रदेश: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक भयंकर आग ने 15 निर्दोष लोगों की जान ले ली, जिनमें अधिकांश एनीमेशन सेंटर के छात्र थे। यह आग ऊषा मेहता मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी। इस दुखद घटना के बाद सरकारी दस्तावेजों से एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार, जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उस पर 2016 में अवैध निर्माण के कारण ध्वस्तीकरण का आदेश था, लेकिन यह आदेश बाद में रहस्यमय तरीके से वापस ले लिया गया।


अवैध निर्माण पर कार्रवाई का इतिहास

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी में स्थित इस 1992 वर्ग फुट के भूखंड के लिए 20 अगस्त 2014 को एक आवासीय नक्शा स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद, यहां व्यावसायिक निर्माण शुरू कर दिया गया। 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की और 10 मई 2016 को इमारत को ध्वस्त करने का अंतिम आदेश जारी किया। हालांकि, मकान मालिकों ने इस आदेश को चुनौती दी और महज दो महीने के भीतर, 5 जुलाई 2016 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपने ही ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया।


मालिकाना हक में बदलाव

जांच में यह भी पता चला है कि 1980 में लॉटरी के माध्यम से आवंटित इस प्लॉट का मालिकाना हक पिछले कुछ दशकों में कई बार बदला गया। 2005 में यह संपत्ति सेल डीड के जरिए विजय कुमार और ऊषा के नाम ट्रांसफर हुई, फिर 2013 में इसे वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला ने खरीद लिया। अगस्त 2014 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आधिकारिक तौर पर इस इमारत को नए मालिकों के नाम म्यूटेट कर दिया।


आग लगने का कारण और उसके परिणाम

प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच से पता चला है कि सोमवार दोपहर लगभग 3 बजे इमारत के एयर-कंडीशनिंग डक्ट में शॉर्ट सर्किट से आग लगी। ऊपरी मंजिलों पर एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और भूतल पर स्थित पेट शॉप व क्लीनिक के कारण अंदर काफी ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी। देखते ही देखते जहरीले धुएं ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इमारत में आपातकालीन निकास न होने के कारण छात्र ऊपरी मंजिलों पर फंस गए।


दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और 19 दमकल गाड़ियों की टीम को फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए कंक्रीट की दीवारों को काटना पड़ा। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बिल्डिंग मानकों के उल्लंघन और दमकल एनओसी की गहन जांच की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी।