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लखनऊ में आग की घटना: 15 लोगों की जान गई, सीएम ने की सहायता की घोषणा

लखनऊ के अलीगंज में एक भीषण आग की घटना में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें अधिकांश छात्र शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है।
 

जान बचाने के लिए लोगों ने छत से कूदने का किया प्रयास


लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को हुई एक भयंकर आग ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इस दुखद घटना में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें 3 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। मृतकों में अधिकांश छात्र थे। आग जिस इमारत में लगी, वह अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित है।


आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं, फायर ब्रिगेड ने किया काबू

बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक हैं, जबकि दूसरे फ्लोर पर एक लाइब्रेरी और 3डी आर्ट प्रोडक्शन का स्टूडियो है। आग लगने के बाद, छात्रों ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया। एक छात्र, जयंत, ने पहले फ्लोर से कूदकर जान बचाई, जबकि अन्य 5 लोग तारों के सहारे नीचे उतरे।


आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। फायर ब्रिगेड की लगभग 10 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया।


सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों से की मुलाकात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रॉमा सेंटर में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और कहा कि इस घटना में जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घटनास्थल का भी दौरा किया।


योगी ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की।


उपमुख्यमंत्री ने घटना को बताया दुखद

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है, जिसमें 15 बच्चे हताहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि घायलों का इलाज अच्छे से किया जा रहा है।


इमारत के मालिक और नक्शे की जानकारी

यह इमारत वीरेंद्र शुक्ला की है, जो रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के मालिक हैं। इमारत का आवासीय नक्शा उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम से पास हुआ था।


जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

नगर निगम ने 2022 से इस इमारत पर कमर्शियल टैक्स लिया था। अब तत्कालीन अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई के लिए एक सूची तैयार की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि इमारत में इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।