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लखनऊ में निजी स्कूलों की फीस पर सख्त नियम लागू, अभिभावकों को मिले अधिकार

लखनऊ में निजी स्कूलों की फीस पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में फीस वृद्धि, शिकायतों के निस्तारण और नियमों के पालन पर चर्चा की गई। अब स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है, और फीस, यूनिफॉर्म तथा किताबों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जानें इस नए नियम के तहत क्या-क्या बदलाव किए गए हैं।
 

लखनऊ में फीस वृद्धि पर नियंत्रण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निजी स्कूलों की फीस को लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में फीस वृद्धि, शिकायतों के समाधान और नियमों के पालन पर गहन चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। अभिभावकों को राहत देने के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी मजबूत किया गया है। फीस, यूनिफॉर्म और किताबों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।


शुल्क वृद्धि पर कड़ी निगरानी

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी विद्यालय द्वारा प्रस्तावित शुल्क वृद्धि की गहन जांच की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि शुल्क वृद्धि निर्धारित मानकों के अनुसार होनी चाहिए और यदि इसमें कोई अनियमितता पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।


शिकायतों के निस्तारण के लिए नोडल अधिकारी

जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति) ज्योति गौतम और जिला विद्यालय निरीक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। अभिभावक स्कूल फीस या अन्य शैक्षणिक शिकायतों के लिए सीधे इन अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगे।


तहसील स्तर पर जांच के लिए टीम गठित

जनपद स्तर पर अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उपजिलाधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की संयुक्त टीम बनाई गई है। इन टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में प्राप्त शिकायतों की जांच कर समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करें।


शुल्क का विवरण वेबसाइट पर अनिवार्य

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालय अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट पर फीस का पूरा विवरण प्रदर्शित करें। इसके साथ ही प्रत्येक शुल्क की रसीद देना अनिवार्य होगा और निर्धारित फीस से अधिक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।


कैपिटेशन फीस पर प्रतिबंध

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार की कैपिटेशन फीस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। विद्यालय छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ऐसा पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।


यूनिफॉर्म में बदलाव पर नियम

निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी विद्यालय में लगातार पाँच शैक्षणिक वर्षों तक यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं किया जाएगा। जहां NCERT पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल NCERT की पुस्तकों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई विद्यालय नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में विद्यालय की मान्यता या NOC भी समाप्त की जा सकती है।


अभिभावकों के अधिकार

छात्र, अभिभावक या अभिभावक-शिक्षक संघ के सदस्य फीस वृद्धि, किताबों या अन्य खरीद से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।