×

लखनऊ में भीषण आग: 15 बच्चों की जान गई, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

लखनऊ के अलीगंज में एक आवासीय इमारत में आग लगने से 15 बच्चों की जान चली गई। यह घटना सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। आग लगने के समय इमारत में कोई स्मोक डिटेक्टर या फायर एक्सटिंग्यूशर नहीं था। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां सूचना मिलने के काफी देर बाद पहुंचीं। इस मामले में यूपी सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार किया गया है।
 

लखनऊ में दर्दनाक आग का हादसा


उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अलीगंज क्षेत्र एक भयानक घटना का गवाह बना है। यहां एक आवासीय इमारत में लगी भीषण आग ने 15 बच्चों की जान ले ली। जब अग्निशामक इस इमारत के अंदर पहुंचे, तो सुरक्षा मानकों की स्थिति देखकर सभी हैरान रह गए। यह अवैध इमारत रिहायशी होने के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग की जा रही थी, जिसमें गेमिंग जोन, पेट शॉप और अन्य दुकानें शामिल थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2016 में इस इमारत को अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो महीने बाद ही यह आदेश रहस्यमय तरीके से वापस ले लिया गया।


बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम की खामियां

इस हादसे में बच्चों की मौत का मुख्य कारण इमारत की तकनीकी लापरवाही थी। पीड़ित परिवारों के अनुसार, गेमिंग जोन और एनीमेशन सेंटर का पूरा ढांचा ऑटोमैटिक था, जिसमें मुख्य दरवाजा बायोमेट्रिक थंब इंप्रेशन से खुलता और बंद होता था। जब आग लगी, तो बिजली और ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम दोनों ही फेल हो गए। बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता यही गेट था, जो बंद हो चुका था। परिजनों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि दमकल की गाड़ियां सूचना मिलने के 40 मिनट बाद पहुंचीं, तब तक आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया था।


बाथरूम में फंसे बच्चे

इमारत के चारों ओर अन्य मकान होने के कारण भागने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। आग आगे के हिस्से में लगी थी, जिससे बच्चे जान बचाने के लिए पीछे की ओर भागे। कुछ बच्चों ने पाइपलाइन और लटके तारों के सहारे नीचे कूदने की कोशिश की। इसी दौरान, एक युवक ने खिड़की का कांच तोड़कर कूदने की कोशिश की, लेकिन वह नीचे लगी नुकीली लोहे की रेलिंग पर गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।


बच्चों की जान बचाने की कोशिश

जैसे-जैसे धुआं बढ़ा, कई बच्चों ने बाथरूम में जाकर खुद को बचाने की कोशिश की। उन्होंने नल खोल दिए ताकि पानी की वजह से आग की गर्मी उन तक न पहुंचे, लेकिन यह निर्णय आत्मघाती साबित हुआ। बाथरूम में वेंटिलेशन न होने के कारण जहरीला धुआं भर गया और अधिकांश बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई।


प्रशासन की कार्रवाई

अग्निशामक विभाग की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इतनी बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के बावजूद इमारत में न तो कोई स्मोक डिटेक्टर था और न ही आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्यूशर मौजूद थे। अंततः दमकल कर्मियों ने पड़ोसी दीवारों को तोड़कर अंदर जाने का रास्ता बनाया, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था। इस मामले में यूपी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।