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लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी को लेकर बढ़ा विवाद, छात्र संगठनों के बीच टकराव

लखनऊ विश्वविद्यालय में जर्जर लाल बारादरी के बंद होने के खिलाफ छात्र संगठनों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। एनएसयूआई और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव के कारण परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और छात्र संगठनों की मांगें।
 

लाल बारादरी पर सियासी हलचल

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित जर्जर लाल बारादरी के बंद होने के खिलाफ सियासी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। पहले एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा और आइसा के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर नमाज अदा कर इफ्तार किया। इसके बाद एबीवीपी ने भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।


मंगलवार को एबीवीपी और राष्ट्रीय छात्र दल से जुड़े छात्रों ने लाल बारादरी के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया और गंगाजल से शुद्धिकरण का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच, मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस समय लखनऊ विश्वविद्यालय में तनाव बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर नजर रखे हुए है।


सोमवार रात को, पुलिस ने सड़क पर नमाज पढ़ने और शांति व्यवस्था को बाधित करने के आरोप में 13 छात्रों के खिलाफ चालान किया। सभी को 24 फरवरी को पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस दिया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में ऐतिहासिक लाल बारादरी के आसपास तनावपूर्ण माहौल बना रहा, जहां विभिन्न छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के कारण हंगामा हुआ और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।


एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने लाल बारादरी में कथित तोड़फोड़ और विश्वविद्यालय परिसर में नमाज और इफ्तारी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में मौजूद अवैध मजारों की जांच कर उन्हें ध्वस्त करने की मांग भी उठाई।