लद्दाख में हाई कोर्ट की बेंच का गठन: केंद्रीय कैबिनेट का महत्वपूर्ण निर्णय
केंद्रीय गृह मंत्री का बड़ा ऐलान
गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्याय प्राप्त करने में कम समय लगेगा।
लद्दाख में हाई कोर्ट की बेंच का प्रभाव
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि लद्दाख में हाई कोर्ट की बेंच के गठन से नागरिकों को कानूनी सहायता के लिए लंबी यात्रा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे न्याय तक पहुंच आसान होगी और कानूनी सेवाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के विकास और इसके लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। यह निर्णय क्षेत्र में न्यायिक प्रणाली को लोगों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अनुच्छेद 370 के बाद लद्दाख का नया स्वरूप
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर को दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया। अब लद्दाख में हाई कोर्ट की बेंच का गठन वहां के निवासियों के लिए न्यायिक सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाने के उद्देश्य से किया गया है। विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कानूनी मामलों के लिए यात्रा करने में लगने वाले समय और कठिनाइयों में कमी आने की उम्मीद है।
कैबिनेट द्वारा अन्य परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने लद्दाख की बेंच के गठन के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति दी, जिनकी अनुमानित लागत 9,450 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, बिहार में NH-22 के मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई, जिसमें 3,590.73 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।