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लो टनल तकनीक: सर्दियों में सब्जियों की अगेती नर्सरी के लिए एक स्मार्ट उपाय

लो टनल तकनीक किसानों के लिए एक प्रभावी उपाय है, जो उन्हें जनवरी की ठंड में भी सब्जियों की अगेती नर्सरी तैयार करने की अनुमति देती है। यह तकनीक न केवल फसलों को समय से पहले बाजार में लाती है, बल्कि किसानों को तीन गुना अधिक लाभ भी देती है। जानें इस तकनीक के बारे में, इसके लाभ, उपयुक्त फसलें और देखभाल के टिप्स।
 

लो टनल तकनीक का परिचय

किसान अब जनवरी की ठंड में भी सब्जियों की अगेती नर्सरी तैयार कर सकते हैं, जिससे फसलें समय से पहले बाजार में आ जाती हैं और उन्हें तीन गुना अधिक लाभ होता है।


भारत में खेती और मौसम का प्रभाव

नई दिल्ली. भारत में कृषि आज भी मौसम पर निर्भर है। उत्तर भारत में जनवरी और फरवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, जिससे रात का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। इस ठंड में खुले खेतों में सब्जियों के बीज अंकुरित नहीं हो पाते और पौधे मर जाते हैं।


लो टनल तकनीक का महत्व

अधिकतर किसान ठंड खत्म होने का इंतजार करते हैं और फरवरी के अंत में बुवाई शुरू करते हैं। लेकिन जो किसान स्मार्ट तरीके से सोचते हैं, वे इस समय का लाभ उठाकर लाखों का मुनाफा कमा लेते हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए 'लो टनल तकनीक' सुझाई है, जो सर्दियों में खेती के लिए वरदान साबित हो रही है।


लो टनल तकनीक की विशेषताएँ

लो टनल तकनीक को गरीबों का ग्रीन हाउस या मिनी पॉली हाउस भी कहा जा सकता है। यह विशेष रूप से उन किसानों के लिए है जिनके पास सीमित जमीन और बजट है।


इसमें खेत के बेड के ऊपर लोहे की पतली छड़ों या बांस की खपचियों का ढांचा बनाया जाता है। यह ढांचा 2 से 3 फीट ऊंचा और अर्धचंद्राकार होता है। इसके ऊपर 20 से 30 माइक्रोन की पारदर्शी प्लास्टिक या पॉलीथीन की चादर चढ़ाई जाती है। यह प्लास्टिक सूर्य की गर्मी को अंदर सोख लेता है, जिससे बाहर की ठंड के बावजूद अंदर का तापमान पौधों के लिए अनुकूल बना रहता है।


अगेती खेती का लाभ

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ 'टाइमिंग' है। जब अन्य किसान फरवरी या मार्च में बुवाई करते हैं, तब तक लो टनल वाले किसानों की फसल तैयार हो चुकी होती है। साधारण विधि से उगाई गई सब्जियां अप्रैल-मई में बाजार में आती हैं, जब दाम गिर जाते हैं। वहीं, लो टनल विधि से तैयार सब्जियां मार्च की शुरुआत में ही बाजार में पहुंच जाती हैं, जब मंडियों में सब्जियों की कमी होती है और दाम ऊंचे होते हैं।


उपयुक्त फसलें

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी में लो टनल के अंदर निम्नलिखित सब्जियों की नर्सरी तैयार करना सबसे फायदेमंद है:


  • टमाटर
  • मिर्च और शिमला मिर्च
  • बैंगन
  • लौकी और तोरई
  • खीरा और ककड़ी
  • करेला
  • तरबूज और खरबूज


वैज्ञानिकों की राय

भारतीय सब्जी अनुसंधान परिषद के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सूर्य नाथ चौरसिया बताते हैं कि यह तकनीक बीजों के 100 प्रतिशत जमाव की गारंटी देती है। किसान बाजार से सस्ती प्रो ट्रे खरीदकर उसमें कोकोपीट और वर्मीकम्पोस्ट का मिश्रण भरकर बीज लगा सकते हैं। इन ट्रे को टनल के अंदर रखने से मात्र 30 से 40 दिनों में स्वस्थ पौध तैयार हो जाती है।


देखभाल के लिए टिप्स

लो टनल में खेती करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:


  • फर्टीगेशन: बीज जमने के बाद पौधों को ताकत देने के लिए एनपीके खाद का हल्का घोल देना चाहिए।
  • सफाई: पॉलीथीन पर धूल जमने से सूरज की रोशनी कम हो सकती है, इसलिए उसे समय-समय पर साफ करते रहें।
  • कठोरीकरण: जब दिन में अच्छी धूप निकले तो टनल के किनारों को थोड़ी देर के लिए खोल देना चाहिए।


सरकार की सहायता

किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी विभाग इस तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। कई राज्यों में लो टनल बनाने के लिए सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जाती है। यह तकनीक बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल है।