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लोकसभा ने MSME विकास विधेयक को बिना चर्चा के पारित किया

लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच 'सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया। इस विधेयक के तहत एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए नए मानदंड और विवादों के निपटारे के लिए समयबद्ध प्रक्रियाएँ शामिल हैं। जानें इस विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ और इसके प्रभाव।
 

MSME विकास विधेयक का पारित होना


लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच "सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026" को बिना किसी चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक पहले ही राज्यसभा से पारित हो चुका था।


जब सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्य गृहमंत्री अमित शाह से चढ़ावा चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर बयान देने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच, आवश्यक दस्तावेज सदन में रखवाने के बाद, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने विधेयक को पेश किया।


पीठासीन अधिकारी ने विधेयक पर संशोधन के लिए सदस्यों के नाम पुकारे, लेकिन विपक्षी सदस्यों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद, विधेयक को बिना चर्चा के सदन में रखा गया और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।


विधेयक की विशेषताएँ

इस विधेयक के पारित होने से एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए संयंत्र एवं मशीनरी या उपकरण में निवेश के साथ-साथ कारोबार को भी आधार बनाया जाएगा। इसकी सीमा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित की जाएगी। सभी एमएसएमई के लिए पंजीकरण स्वैच्छिक होगा और केंद्र तथा राज्य सरकारें इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा कर सकेंगी।


विधेयक में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एमएसएमई से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के सभी बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टी-रीडीएस) के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है।


विवादों के त्वरित निपटारे के लिए मध्यस्थता और पंचाट की प्रक्रिया को विधेयक में समयबद्ध किया गया है। पहली सुनवाई की तिथि से 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता पूरी करनी होगी। यदि मध्यस्थता विफल होती है, तो 30 दिनों के भीतर मामला पंचाट में भेजा जाएगा।


विधेयक में कुछ अपराधों का गैर-आपराधीकरण करते हुए गलत जानकारी देने या आवश्यक सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर चेतावनी और बाद के मामलों में जुर्माने का प्रावधान किया गया है।