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लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 का पारित न होना: महिला आरक्षण पर विपक्ष का विरोध

लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 को विपक्ष के विरोध के कारण पारित नहीं किया जा सका। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का उद्देश्य 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करना था। हालांकि, विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक वोट नहीं मिल सके। जानें इस विधेयक के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव।
 

लोकसभा में विधेयक का पारित न होना

विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 को पारित नहीं किया जा सका। शुक्रवार को कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया। इस संशोधन का उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करना था। इसके साथ ही, लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी था।


मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में तीन विधेयकों पर लगभग 21 घंटे तक चर्चा की। हालांकि, महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक विपक्ष के विरोध के कारण पारित नहीं हो सका। सबसे पहले संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर मतदान हुआ, जिसमें 298 वोट इसके पक्ष में और 230 वोट विपक्ष में पड़े। कुल 528 सदस्यों ने इस वोटिंग में भाग लिया। यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाती।


विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को 352 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन यह 54 वोटों से गिर गया। संविधान संशोधन विधेयक के अस्वीकृत होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार बाकी दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।


विधेयकों पर चर्चा

इन विधेयकों पर हुई चर्चा



  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026

  • केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक- 2026

  • परिसीमन विधेयक- 2026


संविधान संशोधन विधेयक का पारित होना

संविधान संशोधन विधेयक पारित होने का प्रावधान क्या है?


संविधान संशोधन विधेयक तभी पारित माना जाता है जब इसे सदन में उपस्थित वोट देने वाले सदस्यों का दो तिहाई समर्थन प्राप्त हो। संविधान के अनुच्छेद 368(2) के अनुसार, सूचीबद्ध महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावित करने वाले संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पास होने के बाद कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी अनुमोदन की आवश्यकता होती है।