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लोकसभा में हंगामे के बीच दो विधेयक 14 मिनट में पारित

मंगलवार को लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के बीच दो विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए गए। इस प्रक्रिया में केवल 14 मिनट लगे, जिससे संसदीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मॉनसून सत्र में अब तक कुल 11 विधेयक पारित हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश पर चर्चा नहीं हुई। लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रखने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की। जानें इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी।
 

संसद का मॉनसून सत्र हंगामे से प्रभावित


संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र लगातार हंगामे का सामना कर रहा है। मंगलवार को लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के बीच केरल नाम परिवर्तन और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक बिना किसी चर्चा के पारित कर दिए गए। इन दोनों विधेयकों को पास करने में सदन को केवल 14 मिनट का समय लगा, जिससे संसदीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।


हंगामे के बीच विधेयकों का पारित होना

मंगलवार को जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगते रहे। दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर से शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसी दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया। इसके बाद सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जो बिना चर्चा के पारित हो गया। दोनों विधेयकों के बीच केवल 14 मिनट का अंतराल था।


मॉनसून सत्र में विधेयकों की संख्या

मॉनसून सत्र के दौरान अब तक लोकसभा में कुल 11 विधेयक पारित हो चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से केवल दो विधेयकों पर सदन में चर्चा हुई, जबकि बाकी नौ विधेयक विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच बिना बहस के पारित कर दिए गए। मंगलवार को पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने विपक्षी सांसदों से अपील की कि वे अपनी सीट पर बैठकर विधेयकों पर चर्चा में भाग लें। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो रहे हैं, लेकिन विपक्षी सदस्य चर्चा में भाग नहीं ले रहे हैं। लगातार हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल भी 17वें कार्यदिवस पर नहीं चल सके।


लोकसभा अध्यक्ष की अपील

सुबह से ही हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही में कई बार रुकावट आई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष दोनों से आपसी सहमति बनाने की अपील की, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसके माध्यम से सरकार की जवाबदेही तय होती है। बिरला ने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए सरकार सहमत है। इसके बावजूद हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की बैठक को पहले दोपहर दो बजे और फिर बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया। उन्होंने सदन में तख्तियां लाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि सभी दलों को मिलकर संसद चलानी चाहिए।