विजय माल्या का नया दावा: ब्रिटेन में जबरन रोके जाने का आरोप
लंदन में विजय माल्या का बयान
लंदन: भारत में बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में वांछित शराब कारोबारी विजय माल्या ने खुद को निर्दोष बताते हुए एक बार फिर से चौंकाने वाला दावा किया है। सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में माल्या ने कहा कि वह अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि कानूनी प्रतिबंधों के कारण ब्रिटेन में फंसे हुए हैं और उन्हें देश छोड़ने से रोका गया है। उन्होंने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर मामले का 'पोस्टर बॉय' बनाकर गंभीर अन्याय किया गया है।
ब्रिटेन छोड़ने पर कानूनी रोक का दावा
विजय माल्या ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जो लोग उन्हें भारत आने से मना करने वाला भगोड़ा मानते हैं, उन्हें सच्चाई को समझना चाहिए। माल्या के अनुसार, वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उन्हें देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है। संसद में पहले ही यह बताया जा चुका है कि 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (FEOA) के तहत माल्या और नीरव मोदी जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं, और विदेश मंत्रालय उन्हें भारत लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
ED के हलफनामे और कर्ज वसूली का हवाला
माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल एक कथित हलफनामे का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बैंकों की पूरी देनदारी चुका दी गई है। उन्होंने कहा कि तय कर्ज 6,203 करोड़ रुपये के मुकाबले 2021 तक 14,131 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी की जा चुकी है, फिर भी उन्हें लगातार 'धोखेबाज' कहा जा रहा है। माल्या ने यह भी कहा कि ED ने उनकी जब्त संपत्तियों में से किंगफिशर के कर्मचारियों को 350 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया, जो वे खुद नहीं कर पाए थे क्योंकि उनके सभी फंड फ्रीज कर दिए गए थे।
अदालत से राहत की उम्मीद पर झटका
माल्या के इन दावों के विपरीत, भारतीय न्यायपालिका का रुख उनके प्रति बेहद कड़ा बना हुआ है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका पर सख्त टिप्पणी की थी जिसमें 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' की वैधता और खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जो व्यक्ति जानबूझकर भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रह रहा है और न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा है, वह किसी भी प्रकार की कानूनी राहत की उम्मीद नहीं कर सकता।