वित्त मंत्री ने कर प्रक्रिया में जनता की भागीदारी पर जोर दिया
आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार शासन का दृष्टिकोण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कर प्रणाली को सरल और अधिक लोकप्रिय बनाना आवश्यक है। उन्होंने यह बात दिल्ली में राष्ट्रीय आयकर जागरूकता अभियान के दौरान कही। वित्त मंत्री ने आयकर विभाग से आग्रह किया कि वह जनता के साथ संवाद के तरीके में बदलाव लाए। उन्होंने नए कानून को सहानुभूति, निष्पक्षता और दक्षता के साथ लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीतारमण ने अधिकारियों को बताया कि करदाता आपके दुश्मन नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में आपके सहयोगी हैं। उन्होंने विभाग से नए कानून की भावना को समझने का अनुरोध किया और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मानवीय हस्तक्षेप को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार कर प्रक्रिया में जनता की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान
वित्त मंत्री ने बताया कि विभाग अब स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों को करों के महत्व के बारे में समझा रहा है। यह पहले के कठोर और अंतर्मुखी दृष्टिकोण से एक बदलाव है। आयकर अधिनियम 2025, 1961 के अधिनियम का स्थान लेगा, जिसमें 4,000 से अधिक संशोधन किए गए थे। नया ढांचा 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, जो शब्दों की संख्या को 2.6 लाख और धाराओं को 536 तक कम करेगा।
मसौदा प्रक्रिया की जानकारी
सीतारमण ने मसौदा प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। कर अधिकारियों ने छह महीने में 75,000 व्यक्ति-घंटे इस कार्य में समर्पित किए। 31 सांसदों की एक चयन समिति ने विधेयक की समीक्षा की, जिसमें 196 सिफारिशों में से 184 को स्वीकार किया गया। यह व्यापक सहयोग और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।