वित्त मंत्री ने वैश्विक तेल संकट पर भारत की स्थिति स्पष्ट की
नई दिल्ली में वित्त मंत्री का बयान
नई दिल्ली: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक तेल संकट पर सरकार की दृष्टि साझा की। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 2026 को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा है, जिससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में खुदरा महंगाई में आई निरंतर गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। वित्त मंत्री के अनुसार, घरेलू महंगाई आरबीआई के लक्ष्य के निचले स्तर पर होने के कारण तेल की बढ़ती कीमतों का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
जियो पॉलिटिकल तनाव का प्रभाव
जियो पॉलिटिकल तनाव ने तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका और इजरायल की ईरान पर कार्रवाई के बाद सप्लाई चेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारतीय बास्केट की एफओबी कीमत 69.01 डॉलर से बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। चूंकि मध्य पूर्व एक प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र है, वहां की अशांति से कीमतों में वृद्धि स्वाभाविक है। सरकार इस स्थिति पर ध्यान दे रही है.
महंगाई पर सीमित असर का भरोसा
महंगाई पर सीमित असर का भरोसा
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि तेल की कीमतों का महंगाई पर प्रभाव केवल दर पर निर्भर नहीं करता। रुपये का एक्सचेंज रेट और वैश्विक मांग जैसे कई कारक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूंकि देश में महंगाई पहले से ही निचले स्तर पर है, इसलिए इस बार दबाव अधिक नहीं होगा। निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्तमान स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकार तेल के झटकों से निपटने के लिए प्रयासरत है.
खुदरा महंगाई में गिरावट
खुदरा महंगाई दर में निरंतर गिरावट
पिछले वर्षों में खुदरा महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। 2023-24 में सीपीआई महंगाई 5.4 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर 4.6 प्रतिशत रह गई। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक यह घटकर केवल 1.8 प्रतिशत पर आ गई है। जनवरी 2026 में महंगाई 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से काफी नीचे है। महंगाई के इस गिरते स्तर ने भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच मजबूती प्रदान की है.
आरबीआई की मौद्रिक नीति
आरबीआई की सक्रिय मौद्रिक नीति
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सक्रियता दिखाई है। फरवरी 2025 से नीतिगत दरों में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की गई है। इस कदम ने बाजार में तरलता बढ़ाई है और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि ये उपाय वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में सहायक होंगे.
सरकार के राहत उपाय
सरकार के राहत और नियंत्रण उपाय
सरकार ने महंगाई को रोकने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें बफर स्टॉक बढ़ाना, आयात को आसान बनाना और निर्यात पर रोक लगाना शामिल है। इसके अलावा, आयकर में बड़ी छूट दी गई है, जिससे अब 12.75 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई है। जीएसटी में बदलाव और खाद्यान्न की सस्ती दरों पर उपलब्धता से आम आदमी को राहत मिली है। ये सभी उपाय तेल की बढ़ती कीमतों के आर्थिक प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे.