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विपक्ष ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बनाई

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने हाल में चुनाव आयोग से जुड़े खुलासों के बाद यह कदम उठाने का मन बनाया है। कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया है और इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह तीसरी बार नोटिस दिया जा रहा है। जानें इस विवाद के पीछे की वजहें और राजनीतिक स्थिति के बारे में।
 

महाभियोग प्रस्ताव का ऐलान

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, में महाभियोग प्रस्ताव नोटिस लाने का निर्णय लिया है। इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियों ने हाल में चुनाव आयोग से जुड़े खुलासों के बाद ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए यह कदम उठाने का मन बनाया है। सभी दल अगले कुछ दिनों में संसद में नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं।


विपक्षी दलों के बीच सहमति

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया है। सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर विपक्षी दलों के बीच सहमति बन गई है, और हाल में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद इस पहल को आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।


महाभियोग प्रस्ताव का इतिहास

महाभियोग प्रस्ताव का पूर्व इतिहास


ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल तीसरी बार नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस प्रस्तुत किया था। इससे पहले भी दोनों सदनों में इस तरह का प्रस्ताव लाने का प्रयास किया गया था, जिसे खारिज कर दिया गया था। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत निर्धारित है, और इसके लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।


मतदाता सूची पर विवाद

मतदाता सूची के SIR पर विवाद


एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के SIR के दौरान नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित कई मुद्दों पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को बार-बार नजरअंदाज किया।


चुनाव आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, और उनके सभी निर्णय स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।


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