विपक्षी दलों का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च: चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
नई दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
नई दिल्ली - विपक्षी दलों ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस मार्च में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव शामिल हुए। इन नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करते हुए अपनी आवाज उठाई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए, लेकिन इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त याचिका दाखिल की।
मतदाता सूची में गड़बड़ियों का आरोप
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में हुई कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत की। याचिका में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित 11 नेताओं के नाम शामिल हैं। उनका कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
मार्च का आरंभ और प्रदर्शन
विपक्षी सांसदों ने बाराखंभा रोड और कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू किया। इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना और वामपंथी दलों के नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव ने अपने समर्थकों को संबोधित किया।
मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का प्रयास
मार्च से पहले, विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
राहुल गांधी का बयान
मार्च से पहले, राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने इसे भगवान शिव की बारात से जोड़ते हुए कहा कि इसमें सभी शामिल हो सकते हैं। विपक्ष का कहना है कि यह मार्च केवल राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से संबंधित है।
याचिका में उठाई गई मांगें
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने चुनावी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है। याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।