विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: पत्रकारिता की चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ
पत्रकारिता की स्वतंत्रता का महत्व
जितेन्द्र बच्चन वरिष्ठ पत्रकार
उत्तर प्रदेश: हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करना और पत्रकारों के बलिदान को सम्मानित करना है। हालांकि, यह देखा गया है कि राजनीतिक दल और सरकारी अधिकारी इसे केवल एक औपचारिकता मानते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों का जश्न मनाने और पत्रकारों की शहादत को याद करने के बजाय, कई बार सरकार इस पर चुप्पी साध लेती है, जो मीडिया की उपेक्षा का संकेत है।
इस वर्ष की थीम 'पत्रकारिता: नई तकनीक (एआई) और मानवाधिकारों का समन्वय' है। हमें यह स्पष्ट करना होगा कि स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे सटीक जानकारी, जवाबदेही और पारदर्शिता के माध्यम से वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान करती है। एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो जनमत को आकार देने और सत्ता को जवाबदेह ठहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पत्रकारिता की जिम्मेदारी के साथ-साथ, एक छोटी सी गलती से लोगों का विश्वास भी डगमगा सकता है।
हालांकि, आज निष्पक्ष पत्रकारिता करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। राजनीतिक दबाव, कॉर्पोरेट स्वामित्व, विज्ञापनों पर निर्भरता और भय के कारण पत्रकारिता का स्वरूप बदल चुका है। भारत की विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में गिरती रैंकिंग (2023 में 161वीं) इस खतरे को दर्शाती है। सत्ता का एक वर्ग मीडिया का उपयोग अपने लाभ के लिए कर रहा है, जिससे स्वतंत्र कवरेज सीमित हो रही है। कई मीडिया हाउस अब एक विशेष एजेंडे को बढ़ावा देने में लगे हैं।
फिर भी, विपरीत परिस्थितियों में भी कई पत्रकार ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ कार्य कर रहे हैं। भले ही उनकी संख्या कम हो, लेकिन वे खत्म नहीं हो सकते। लोगों को अब इस बात का एहसास हो रहा है। सरकार को समझना होगा कि कुछ पत्रकारों या मीडिया संस्थानों को आर्थिक प्रलोभन देकर नियंत्रित करने का प्रयास लंबे समय तक नहीं चल सकता। जब सच सामने आएगा, तो ऐसे प्रयासों का पर्दाफाश होगा। इसलिए, मीडिया की स्वतंत्रता को बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कमजोर न पड़े।