विश्व बैंक की चेतावनी: रोजगार संकट की ओर बढ़ रही दुनिया
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के संकेत
नई दिल्ली - मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, विशेषकर इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के संकेत उभरने लगे हैं। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक गंभीर और लंबे रोजगार संकट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में करोड़ों लोग बेरोजगारी का सामना कर सकते हैं।
1.2 अरब लोगों के लिए रोजगार की चुनौती
अजय बंगा के अनुसार, अगले 10 से 15 वर्षों में विकासशील देशों में लगभग 1.2 अरब लोग कामकाजी उम्र में प्रवेश करेंगे, लेकिन मौजूदा हालात में केवल 40 करोड़ नई नौकरियां ही सृजित हो पाएंगी। इसका मतलब है कि लगभग 80 करोड़ नौकरियों की भारी कमी हो सकती है। उन्होंने 'शॉर्ट-वेलोसिटी साइकल' का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति-निर्माता तात्कालिक भू-राजनीतिक संकटों में उलझकर दीर्घकालिक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता
विश्व बैंक के प्रमुख ने कहा कि सरकारों को रोजगार के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ पानी, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रोजगार के अवसर नहीं बढ़े, तो अवैध प्रवासन और सामाजिक अस्थिरता में वृद्धि हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक 11.7 करोड़ से अधिक लोग विस्थापन का सामना कर सकते हैं।
निजी निवेश की भूमिका
विश्व बैंक ने विकासशील देशों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। इनमें व्यापार नियमों को सरल बनाना, श्रम और भूमि कानूनों में सुधार, लॉजिस्टिक्स में सुधार और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण शामिल हैं। बंगा ने उदाहरण देते हुए कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा ग्रुप जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार कर रही हैं।
सुरक्षित पेयजल और बिजली की उपलब्धता
विश्व बैंक का लक्ष्य एक अरब लोगों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना और विशेषकर अफ्रीका में करोड़ों लोगों को बिजली उपलब्ध कराना है। अजय बंगा ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकारों, विकास बैंकों और निजी निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संयुक्त प्रयासों के जरिए ही दुनिया मौजूदा आर्थिक दबावों और भविष्य के संभावित संकटों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकती है।