×

विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर में किया सुधार

विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। यह वृद्धि अमेरिका-ईरान संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद हुई है। रिपोर्ट में भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और जीएसटी में कटौती के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है और भारत की आर्थिक स्थिति पर इसका क्या असर होगा।
 

भारत की विकास दर में वृद्धि


जनवरी में 6.5 प्रतिशत ग्रोथ बताई गई थी, जिसे अब 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।


भारत की जीडीपी वृद्धि (बिजनेस डेस्क): अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस स्थिति ने विश्व सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे भारत समेत कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की कमी महसूस की जा रही है। इस तनाव के एक महीने से अधिक समय तक चलने के बावजूद, भारत ने संतुलन बनाए रखा है, जिसके परिणामस्वरूप विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ा दिया है। पहले यह 6.5 प्रतिशत था, जिसे अब 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।


वैश्विक ऊर्जा बाजार में बाधा

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने के बाद से मध्य पूर्व में अनिश्चितता बढ़ गई है। 8 अप्रैल को इन देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी है, लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बाधित कर दिया है। विश्व बैंक के अन्य पूर्वानुमानकर्ताओं ने इस अनिश्चितता के कारण विकास दर के अनुमानों को 5.9 से 6.7 प्रतिशत के दायरे में घटा दिया है। विश्व बैंक के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का दबाव बनेगा, जिससे परिवारों की खर्च करने योग्य आय सीमित हो जाएगी।


भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती

विश्व बैंक के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और मांग मजबूत बनी हुई है। जीएसटी में कटौती जैसे कदम विकास को गति दे रहे हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन सकती है। आगामी तिमाहियों में आर्थिक विकास की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक बाजार इस ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव से कैसे निपटते हैं।


विश्व बैंक की रिपोर्ट में उल्लेख

विश्व बैंक की 'साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट' रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों में हालिया कटौती से वित्तीय वर्ष के प्रारंभिक महीनों में उपभोक्ता मांग को मजबूती मिलेगी। हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा बाजारों में व्यवधान विकास की राह में चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। विश्व बैंक ने जनवरी में अपनी 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स' रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।