विश्वकर्मा पूजा: मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का महत्व
विश्वकर्मा पूजा का पर्व
नई दिल्ली: इस वर्ष 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन का एक महत्वपूर्ण पहलू है मशीनों पर स्वस्तिक बनाना। आइए जानते हैं कि मशीनों पर स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है और इसके पीछे क्या महत्व है।
स्वस्तिक का धार्मिक महत्व
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों, दुकानों, और कार्यालयों में मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक महत्व है। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को एक पवित्र और शुभ चिन्ह माना जाता है। स्वस्तिक शब्द 'सु' और 'अस्ति' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'शुभ होना' या 'कल्याण होना'। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर की जाती है।
स्वस्तिक बनाने के कारण
मशीनों पर रोली, कुमकुम और सिंदूर से स्वस्तिक बनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं। पहला यह है कि स्वस्तिक भगवान श्री गणेश का प्रतीक है, जो विघ्नहर्ता हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से काम में कोई बाधा नहीं आती और कार्य सुचारू रूप से चलता है।
दूसरा कारण समृद्धि से जुड़ा है। स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जहां स्वस्तिक होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से व्यापार में वृद्धि होती है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा है। कारीगर और श्रमिक दिनभर मशीनों पर काम करते हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाकर वे अपनी सुरक्षा और मशीन की दीर्घकालिकता की कामना करते हैं।
अन्य शुभ चिन्ह
स्वस्तिक के अलावा, विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों और औजारों पर कई अन्य शुभ चिन्ह बनाए जाते हैं। इनमें से एक 'ॐ' का निशान है, जिसे कई जगह मशीनों पर लिखा जाता है। इसे ब्रह्मांड की ध्वनि और सृष्टि की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा, 'शुभ-लाभ' भी लिखा जाता है, जिसका अर्थ है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कार्य शुभ हो और उसमें लाभ हो। यह व्यापार में बरकत के लिए लिखा जाता है।
पूजा की अन्य रस्में
विश्वकर्मा पूजा के दौरान कई लोग कलावा या मौली भी बांधते हैं। पूजा के बाद मशीनों के हैंडल, स्विच और औजारों पर लाल रंग का कलावा बांधा जाता है, जिसे रक्षा कवच के रूप में देखा जाता है।
इसके साथ ही, मशीनों पर तिलक और फूल-माला चढ़ाई जाती है। कारीगर सभी मशीनों को अच्छे से साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाते हैं। इसके बाद गेंदे या अन्य फूलों की माला पहनाई जाती है। कई फैक्ट्रियों में मशीनों को नए कपड़े की तरह सजाया जाता है।