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वैशाख अमावस्या: जानें तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

वैशाख अमावस्या, जो पितरों के लिए समर्पित है, इस वर्ष 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। जानें इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व। यह लेख आपको इस विशेष दिन की धार्मिक परंपराओं और महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।
 

पितरों के लिए समर्पित अमावस्या


अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है
वैशाख अमावस्या, जो साल में 12 बार आती है, का विशेष महत्व है। यह दिन पितरों को समर्पित है, जब तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस दिन किए गए तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।


स्नान और दान का महत्व

अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वैशाख अमावस्या पर नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए, जिससे गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है।


वैशाख अमावस्या की तिथि

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की अमावस्या 16 अप्रैल को रात 8:11 बजे शुरू होगी और 17 अप्रैल को शाम 5:21 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, इसे 17 अप्रैल को मनाया जाएगा।


शुभ योग का महत्व

इस वर्ष वैशाख अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा, जो ज्योतिष में बहुत शुभ माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलती है। दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।


स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

वैशाख अमावस्या पर स्नान-दान के लिए सुबह 5:54 से 10:44 बजे तक का समय सबसे उत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना भी शुभ माना गया है, जो 17 अप्रैल को 4:49 से 5:34 बजे तक रहेगा। अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त भी इस दिन उपलब्ध हैं।