वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव: एस जयशंकर का दृष्टिकोण
नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2026
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक तनाव के संदर्भ में कहा कि वर्तमान में कोई भी देश पूरी तरह से हावी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि 20वीं सदी के मध्य से एक स्थिर वैश्विक व्यवस्था की उम्मीद करना 'अवास्तविक' था, क्योंकि शक्ति अब विभिन्न आयामों में फैल गई है।
दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में अपने विचार साझा करते हुए, जयशंकर ने पिछले 70 वर्षों में वैश्विक शासन के विकास पर चर्चा की। उन्होंने कहा, 'जब हम इन सात दशकों को देखते हैं, तो 1945 या 1989 को स्थिर मानने की उम्मीद एक अवास्तविक धारणा थी।'
उन्होंने यह भी कहा कि 1945 और 1989 के बाद की वैश्विक व्यवस्था को स्थायी बनाए रखने की अपेक्षा करना गलत था। उनका कहना था कि पिछले 70 साल केवल भारत के हजारों साल के इतिहास का एक छोटा हिस्सा हैं, इसलिए दुनिया का बदलना स्वाभाविक है।
वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के प्रमुख कारक
जयशंकर ने बताया कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो मुख्य ताकतें हैं: तकनीक और जनसंख्या का स्वरूप। आने वाले दशक में ये दोनों कारक दुनिया की दिशा को निर्धारित करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द होता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दुनिया धीरे-धीरे कई ताकतों में विभाजित हो रही है। अब कोई भी देश हर क्षेत्र में पूरी तरह से हावी नहीं है, चाहे वह अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, तकनीक या कूटनीति हो।
विदेश मंत्री के अनुसार, आज ताकत का अर्थ केवल जीडीपी या सैन्य शक्ति नहीं रह गया है। विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न देशों की ताकत बढ़ रही है, जिससे वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैली हुई है।