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व्हाइट हाउस में किंग चार्ल्स तृतीय का स्वागत, ट्रंप ने ईरान पर की चर्चा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किंग चार्ल्स तृतीय के सम्मान में व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि अमेरिका ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। चार्ल्स ने अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों को मजबूत बताया और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक में और क्या चर्चा हुई।
 

स्टेट डिनर में ट्रंप और चार्ल्स का संवाद

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किंग चार्ल्स तृतीय के सम्मान में व्हाइट हाउस में एक स्टेट डिनर का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने ईरान के साथ चल रहे अमेरिका-इजरायल संघर्ष का उल्लेख किया। 


ईरान के साथ यह संघर्ष अमेरिका और ब्रिटेन के बीच तनाव का कारण बन गया है। ट्रंप ने कहा कि हम मध्य पूर्व में कुछ महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं और परिणाम सकारात्मक हैं।


सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा और चार्ल्स भी इस बात से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि हमने उस दुश्मन को सैन्य रूप से पराजित कर दिया है और हम इसे कभी भी परमाणु हथियार बनाने नहीं देंगे। चार्ल्स इस मामले में मुझसे भी अधिक सहमत हैं।


कांग्रेस की संयुक्त बैठक में बोलते हुए, चार्ल्स ने कहा कि यूरोप से लेकर मध्य पूर्व तक संघर्ष के समय दोनों देशों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, जिसका प्रभाव दोनों समाजों पर पड़ रहा है।


उन्होंने वाशिंगटन के पास हाल ही में हुई हिंसक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की हिंसा कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा और सभी लोगों को नुकसान से बचाने के लिए साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।


चार्ल्स ने अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों को साझा लोकतांत्रिक परंपराओं में निहित बताया, भले ही यह प्रारंभिक असहमतियों से उभरा हो। उन्होंने कहा कि हमारे देश स्वाभाविक रूप से एक समान सोच रखते हैं।


किंग चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका और ब्रिटेन के संबंधों को मजबूत बताया। उन्होंने इन संबंधों को मैग्ना कार्टा और इंग्लिश कॉमन लॉ जैसे सामान्य कानूनी और राजनीतिक आधार से जोड़ा, जिसने अमेरिकी संवैधानिक सिद्धांतों को विकसित करने में मदद की।


किंग ने वर्तमान वैश्विक माहौल में सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे इतनी बड़ी हैं कि कोई एक देश अकेले उनका सामना नहीं कर सकता। उन्होंने दोनों देशों से अपने गठबंधन को और मजबूत करने की अपील की।