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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों के बीच राघवी कुमारी का समर्थन

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं, जिसके बाद राघवी कुमारी ने उनका समर्थन किया है। उन्होंने इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया है। राघवी का कहना है कि शंकराचार्य का पद वेदों की सर्वोच्च आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। इस विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और राघवी कुमारी ने क्या कहा।
 

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज विवादों में फंस गए हैं। बटुकों ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए प्रयागराज में मामला दर्ज कराया है। मेडिकल परीक्षण में भी यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। इस स्थिति में, उन्होंने और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का सहारा लिया है। अब यह देखना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट आज क्या निर्णय सुनाता है?



इस बीच, कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेटी राघवी कुमारी ने ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के समर्थन में एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि शंकराचार्य का पद वेदों की सर्वोच्च आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है और इस पर आघात सहन नहीं किया जाएगा।


राघवी कुमारी ने लिखा कि कल इलाहाबाद हाईकोर्ट में शंकराचार्य जी की सुनवाई है। शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं होता, यह चार वेदों की जीवित परंपरा का सबसे उच्च आध्यात्मिक स्थान है। इस पद की गरिमा केवल एक पीठ या मठ की नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि माघ मेला जैसे पवित्र अवसर पर जो विवाद उत्पन्न हुए, उन्होंने कई भक्तों को गहरा दुख पहुंचाया है। राज्य की जिम्मेदारी केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान और सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी सरकार का कर्तव्य है।


शंकराचार्य पर लगाए गए तथाकथित आरोप केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाने का प्रयास नहीं हैं, बल्कि उस सनातन आध्यात्मिक परंपरा को कमजोर करने की कोशिश है जिसकी नींव आदि शंकराचार्य ने रखी थी। राघवी कुमारी ने लिखा कि सदियों से वेदों की ज्योति जलाने वाली इस परंपरा को बदनाम करने की हर कोशिश पहले भी असफल रही है और आगे भी होगी। आस्था पर आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। सत्य की हमेशा विजय होती है। न्यायालय पर विश्वास है। हर हर महादेव।