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शशि थरूर का पासपोर्ट विवाद पर सरकार को सुझाव

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पासपोर्ट और आधार कार्ड को भारतीय नागरिकता का वैध प्रमाण मानने की मांग की है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि कानूनी ढांचे में संशोधन किया जाए ताकि ये दस्तावेज नागरिकता के निर्णायक प्रमाण बन सकें। थरूर ने इस मुद्दे पर प्रशासनिक बाधाओं और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का भी उल्लेख किया। जानें उनके विचार और इस विवाद के पीछे की कहानी।
 

पासपोर्ट और आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण मानने की मांग


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को पासपोर्ट के नागरिकता से जुड़े विवाद पर सरकार से अपील की है कि वह कानूनी ढांचे में बदलाव कर पासपोर्ट और आधार कार्ड को भारतीय नागरिकता का वैध प्रमाण मानें।


थरूर ने कहा कि इसके लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बाधा को दूर करना होगा, क्योंकि वर्तमान में आधार कार्ड 182 दिन के स्थानीय निवास के आधार पर जारी किया जाता है, जो नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों के पास हो सकता है।


उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सुझाव दिया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को एक अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करना चाहिए, जिसमें तिरछी लाल पट्टी जैसी स्पष्ट पहचान हो, जो विशेष रूप से भारत में रहने वाले गैर-नागरिकों के लिए हो।


पूर्व विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि विदेश मंत्रालय का हालिया बयान यह स्पष्ट करता है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का निर्णायक प्रमाण। इससे लोगों में भ्रम और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।


थरूर ने कहा कि सरकार इसे पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा-20 के तहत एक पुरानी कानूनी स्थिति बताकर बचाव कर रही है, जो तकनीकी रूप से दुर्लभ परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देती है, लेकिन आम नागरिक के लिए यह फर्क बेमतलब है।


उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से पासपोर्ट को पहचान का सबसे बड़ा मानक माना गया है। इसे प्राप्त करने के लिए नागरिकों को पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।


थरूर ने सवाल किया कि यदि पासपोर्ट देश के भीतर नागरिकता स्थापित नहीं करता, तो फिर कौन-सा दस्तावेज ऐसा करता है?


उन्होंने यह भी बताया कि उच्चतम न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं।


कांग्रेस नेता ने कहा कि इससे लाखों भारतीय एक अजीब प्रशासनिक स्थिति में आ गए हैं, जहां उनके पास विश्वस्तरीय बायोमेट्रिक और सरकारी दस्तावेज हैं, लेकिन इनमें से कोई भी उनके नागरिकता का ‘निर्णायक’ प्रमाण नहीं माना जाता।


उन्होंने कहा कि इस विवाद को समाप्त करने के लिए एक व्यापक विधायी सुधार की आवश्यकता है, जिसमें पासपोर्ट और आधार कार्ड को भारतीय नागरिकता का वैध प्रमाण माना जाए।