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शशि थरूर का ब्रिक्स पर दृष्टिकोण: भारत का वैश्विक मंच के रूप में महत्व

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ब्रिक्स को एक ऐसा मंच बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जो गैर-पश्चिमी हो, लेकिन पश्चिम-विरोधी न हो। उन्होंने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, खासकर द्विपक्षीय बैठकों और वैश्विक मुद्दों पर सहमति बनाने में। थरूर ने भारत-चीन संबंधों में तनाव और व्यापारिक असंतुलन की चिंताओं पर भी प्रकाश डाला। जानें इस सम्मेलन के महत्व और भारत की कूटनीतिक चुनौतियों के बारे में।
 

ब्रिक्स का गैर-पश्चिमी दृष्टिकोण

कांग्रेस के प्रमुख नेता शशि थरूर ने सुझाव दिया है कि भारत को ब्रिक्स को एक ऐसा मंच बनाए रखने पर जोर देना चाहिए जो "गैर-पश्चिमी हो, लेकिन पश्चिम-विरोधी नहीं"। उनका मानना है कि ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी के रूप में प्रस्तुत करना भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ होगा। थरूर ने कहा कि कुछ सदस्य देश इसे भू-राजनीतिक पश्चिम-विरोधी दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत को ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाने के साथ-साथ अपने राष्ट्रीय हितों का भी ध्यान रखना चाहिए।


सम्मेलन की मेज़बानी का महत्व

सम्मेलन की मेज़बानी और द्विपक्षीय बैठकों का महत्व

थरूर ने भारत द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी को "बड़ी प्रतिष्ठा" का विषय बताया, जिसमें लगभग एक दर्जन राष्ट्राध्यक्ष भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन द्विपक्षीय बातचीत के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित मुलाकातें वैश्विक स्तर पर विशेष ध्यान आकर्षित करेंगी।


भारत-चीन संबंधों की चुनौतियाँ

भारत-चीन संबंधों में सीमा और व्यापार संबंधी चुनौतियां

भारत-चीन संबंधों पर चर्चा करते हुए थरूर ने कहा कि 2020 की गलवान घटना के बाद से रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसका मुख्य कारण चीनी पक्ष के उठाए गए कदम हैं। उन्होंने चीन पर आरोप लगाया कि वह अनिश्चित सीमा के पास स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और व्यापार को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। थरूर ने कहा कि एक आत्मसम्मानित भारत ऐसे दबावों के आगे नहीं झुकेगा।


ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व

ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व और कूटनीतिक परीक्षा

थरूर ने ब्रिक्स को 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया, जिसमें 11 सदस्य देश दुनिया की अधिकांश आबादी और 41 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहा है। पहले सर्वसम्मति से घोषणापत्र के बजाय 'अध्यक्षीय घोषणापत्र' जारी करना पड़ा था, और इस बार भी आम सहमति बनाना भारतीय कूटनीति की परीक्षा होगी।


व्यापारिक असंतुलन की चिंताएँ

व्यापारिक असंतुलन और अमेरिकी प्रतिबंधों की चिंता

व्यापारिक संतुलन पर चिंता जताते हुए थरूर ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन यह अक्सर भारत के नुकसान में रहा है। इसके अलावा, रूस के साथ व्यापार जारी रखने पर अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से भारतीय सामानों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि अमेरिका के साथ संबंध अनिश्चित होते हैं, तो भारत को ब्रिक्स का उपयोग अपने निर्यात बाजारों और संचार माध्यमों को विविध बनाने के लिए करना चाहिए।