शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्रों का बढ़ा विरोध, राज्यों में जवाबदेही की मांग
नई दिल्ली में विरोध की लहर
नई दिल्ली: पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद, विभिन्न राज्यों में शिक्षा मंत्रियों से भी जवाब मांगा जा रहा है। छात्र संगठनों और विपक्ष ने पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
राज्यों में जवाबदेही की मांग तेज
केंद्रीय घटनाक्रम के बाद, छात्र संगठनों ने राज्य सरकारों पर भी दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। झारखंड, पंजाब, केरल, कर्नाटक और अन्य राज्यों में प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। छात्रों का कहना है कि यदि केंद्रीय स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है, तो राज्यों में भी समान मानदंड लागू होने चाहिए।
लखनऊ में विश्वविद्यालय के छात्रों ने बड़े प्रदर्शन का ऐलान करते हुए कहा कि जिन राज्यों में भर्ती परीक्षाओं या पेपर लीक के मामले उठे हैं, वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से भी जवाब लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
पंजाब और आंध्र प्रदेश में राजनीतिक विवाद
पंजाब में फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा और कृषि विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। फार्मेसी भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और ब्लूटूथ डिवाइस, पेन कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। विपक्ष इसे व्यवस्था की विफलता मानते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि परीक्षा के दौरान हाई-टेक नकल की कोशिश को समय रहते पकड़ लिया गया। दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश में मेगा डीएससी-2025 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर वाईएसआर कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और पूरे मामले की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है।
तेलंगाना में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
तेलंगाना में भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। भाजपा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर जवाब मांगा है और लंबित ट्यूशन फीस री-इंबर्समेंट का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि लाखों छात्रों से जुड़े मामलों का समय पर समाधान नहीं हो रहा है। इन घटनाओं के बीच, छात्र संगठनों का कहना है कि चाहे मामला पेपर लीक का हो, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का या शिक्षा से जुड़े प्रशासनिक फैसलों का, हर स्तर पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि युवाओं का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।