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शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार के खिलाफ धरना दिया, गरीबों के अधिकारों की रक्षा की मांग

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिया है, जिसमें उन्होंने गरीबों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने के मामले में उन्होंने नाराजगी जताई और प्रभावित परिवारों के लिए नए आवास की व्यवस्था का आश्वासन दिया। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और चौहान की मांगें।
 

धरने पर बैठे शिवराज सिंह चौहान


नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ एक केंद्रीय मंत्री ने मोर्चा खोला है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गरीबों के अधिकारों के लिए धरने पर बैठ गए हैं। रविवार को उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और फिर अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के खिलाफ धरना शुरू किया।


आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। 11 अक्टूबर को शिवराज ने गांव का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने घरों के ध्वस्त होने और फसलों को हुए नुकसान की जानकारी ली। शिवराज ने स्पष्ट किया कि गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


फसलें बर्बाद और कुएं को मिट्टी से भरा


यह मामला अतिक्रमण हटाने के दौरान की कार्रवाई से जुड़ा है। कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन ने आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़ा। इसके साथ ही खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसलें भी बर्बाद हो गईं। इसके अलावा, पानी के लिए उपयोग होने वाले कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया। इस स्थिति ने प्रभावित परिवारों के लिए जीवन यापन का संकट खड़ा कर दिया है।


मुख्य सचिव से की बातचीत


शिवराज सिंह चौहान ने घटनास्थल पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर अपनी नाराजगी व्यक्त की। इसके अलावा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी इस मामले की जानकारी दी। शिवराज ने आश्वासन दिया कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए आवास की व्यवस्था की जाएगी। जब तक स्थायी आवास नहीं मिलते, तब तक अस्थायी व्यवस्था भी की जाएगी।