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शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस: बांग्लादेश की स्थिति और छात्र आंदोलन पर विचार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति, छात्र आंदोलन और अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले पर अपनी राय व्यक्त की। हसीना ने कहा कि उन्हें अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उनका अपने लोगों से संबंध कभी नहीं टूटा। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाई है। जानें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में और क्या कहा गया।
 

शेख हसीना का भावुक संबोधन

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में आयोजित अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होते हुए, उन्होंने बताया कि उन्हें अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उनका अपने देशवासियों से संबंध कभी नहीं टूटा। इस दौरान, वह कई बार भावुक हो गईं और अपने पिता, परिवार और 1971 के मुक्ति संग्राम में शहीद हुए लोगों को याद किया।


बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता

हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह बांग्लादेश की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनके अनुसार, आज का बांग्लादेश उस देश से पूरी तरह भिन्न है जिसके लिए लाखों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात उन्हें निरंतर दुखी कर रहे हैं।


2024 के छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया

शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभ में यह आंदोलन छात्रों की मांगों तक सीमित था, लेकिन बाद में कुछ संगठित समूहों ने इसे राजनीतिक हथियार बना दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए बातचीत और धैर्य का सहारा लिया, लेकिन आंदोलन का असली उद्देश्य उनका इस्तीफा बन गया। बांग्लादेश लौटने के सवाल पर, उन्होंने कहा कि उचित समय पर इस बारे में जानकारी देंगी।


अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले पर प्रतिक्रिया

मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा पर हसीना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमे और मनगढ़ंत आरोप उन्हें डराने में असफल हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताया। इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा, बल्कि प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री आवास के करीब पहुंचने के बाद उन्हें जल्दी निकलना पड़ा।


भारत सरकार की प्रतिक्रिया

शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम से उसका कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार इस मंच पर व्यक्त विचारों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हसीना को शरण देते समय यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय भूमि का उपयोग किसी अन्य संप्रभु देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश ने पहले ही इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति जताई है और माना है कि भारत से आए ऐसे राजनीतिक बयान दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।