श्री ब्रिज मोहन बक्शी: संघर्ष और सेवा का प्रतीक
प्रार्थना सभा का आयोजन
23 जून को चिन्मय मिशन सेंटर में होगी प्रार्थना सभा
नई दिल्ली: समाज सेवा, जनकल्याण और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित वरिष्ठ समाजसेवी श्री ब्रिज मोहन बक्शी का 14 जून को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में एक गहरी रिक्तता उत्पन्न हुई है। वे ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने जीवन के हर चरण में संघर्ष को अवसर में बदलकर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
श्री बक्शी का जन्म 1938 में अविभाजित भारत के रावलपिंडी जिले के तर्कवाल में हुआ। उन्होंने अपने बचपन में देश विभाजन की पीड़ा को नजदीक से देखा। विभाजन के दौरान उनका परिवार भी विस्थापित हुआ और अंततः अंबाला में बस गया। उनके पिता, स्वर्गीय बख्शी अमरनाथ, अपने समय के प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे और अंबाला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। लेकिन कम उम्र में पिता के निधन ने परिवार पर कठिनाइयों का बोझ डाल दिया।
इन चुनौतियों के बावजूद, श्री बक्शी ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभाया, बल्कि समाज में भी अपनी एक पहचान बनाई। सरकारी उद्योग विभाग में काम करते हुए उन्होंने हमेशा ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को प्राथमिकता दी।
सेवानिवृत्ति के बाद उनका सामाजिक जीवन और भी सक्रिय हो गया। वे न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के 14 वर्षों तक अध्यक्ष रहे और अपने कार्यकाल में क्षेत्र के विकास तथा नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में वे संस्था के मुख्य संरक्षक के रूप में भी मार्गदर्शन देते रहे।
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सम्मान के लिए उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। सीनियर सिटीजन फोरम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बुजुर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए। वहीं आर्य समाज मंदिर के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री बक्शी का व्यक्तित्व सादगी, विनम्रता और सेवा भाव का अद्भुत संगम था। वे लोगों की समस्याओं को सुनने, उनका समाधान खोजने और समाज को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। यही कारण था कि वे सभी वर्गों के लोगों के बीच सम्मान और विश्वास के पात्र बने रहे।
आज वे हमारे बीच भले ही नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित आदर्श, समाज सेवा की भावना और जनहित के लिए किया गया कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। वे अपने पीछे पत्नी, दो पुत्रों, परिवारजनों, मित्रों और असंख्य शुभचिंतकों को छोड़ गए हैं, जिनके हृदय में उनकी स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी।
श्री ब्रिज मोहन बक्शी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण के बल पर एक सार्थक और प्रेरणादायक जीवन जिया जा सकता है।
श्री ब्रिज मोहन बक्शी जी की आत्मिक शांति और उनके द्वारा जिए गए एक सुंदर जीवन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए परिवार द्वारा 23 जून 2026, दिन मंगलवार को एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है। यह प्रार्थना सभा नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन सेंटर में दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। शोक संतप्त परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती वंदना (परवीन) बक्शी, पुत्र व पुत्रवधुएं अनु एवं नीलकांत बक्शी, राधिका एवं विवेक बक्शी और पौत्र-पौत्रियां महक, अर्चित, कार्तिकेय नील तथा अभिनव शामिल हैं। बक्शी, दत्ता, अदलखा और मोहन परिवारों की ओर से सभी शुभचिंतकों से इस प्रार्थना सभा में शामिल होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करने का आग्रह किया गया है।