संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का मीडिएशन का सुझाव
संपत्ति विवाद में नई सुनवाई
दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर से संबंधित संपत्ति विवाद में एक नया मोड़ आया है। सोमवार को, सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर नोटिस जारी किया। रानी कपूर, जो संजय कपूर की मां हैं और 80 वर्ष की हैं, के मामले में कोर्ट ने उनकी उम्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लड़ाई का समय नहीं है।
कोर्ट का मीडिएशन का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने संजय की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और 22 अन्य से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिवार के विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा, 'आप सभी क्यों लड़ रहे हैं? आप 80 साल की हैं। यह आपकी उम्र नहीं है कि आप लड़ाई करें।' बेंच ने यह भी कहा कि लंबी अदालती लड़ाई किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से सुझाव दिया कि पूरे मामले को मध्यस्थता के लिए ले जाना चाहिए।
रानी कपूर की याचिका का विवरण
रानी कपूर ने अपनी याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि संपत्ति और संबंधित मामलों में दूसरों को हस्तक्षेप करने से रोका जाए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के कुछ आदेशों को भी चुनौती दी है, यह कहते हुए कि संपत्ति को ठीक से सुरक्षित नहीं रखा गया है और एसेट्स के बिखरने का खतरा है।
रानी कपूर की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने अदालत में दलील दी कि बड़े संपत्ति विवादों में अदालत आमतौर पर प्रारंभिक चरण में ही सुरक्षा आदेश जारी करती है।
विवाद की जड़
यह विवाद रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट से संबंधित है। रानी कपूर ने इस ट्रस्ट के गठन को चुनौती दी है, यह आरोप लगाते हुए कि ट्रस्ट इस तरह से बनाया गया कि इससे उनकी संपत्ति का नियंत्रण छीन लिया गया, जिसमें सोना ग्रुप में उनकी हिस्सेदारी भी शामिल है।
रानी कपूर ने बताया कि 2017 में उन्हें स्ट्रोक आया था, जिसके बाद उनके बेटे संजय और अन्य लोगों ने उनकी सहमति के बिना संपत्ति का हस्तांतरण कर दिया। संजय कपूर की मृत्यु के बाद, यह विवाद और बढ़ गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले से जुड़े कई मामले चल रहे हैं, जिनमें संजय कपूर की पूर्व पत्नी, अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं।
कोर्ट का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि परिवार के सदस्यों को विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए। लंबी लड़ाई से कोई लाभ नहीं होगा, विशेषकर 80 वर्ष की आयु में। अब यह देखना होगा कि परिवार मध्यस्थता का रास्ता अपनाता है या नहीं।