संजय राउत की नई किताब में विवादास्पद दावे और राजनीतिक किस्से
संजय राउत का राजनीतिक सफर
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत एक दिलचस्प शख्सियत हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति में उद्धव ठाकरे की पार्टी का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। हाल ही में, राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों के फेयरवेल भाषण के दौरान, एक सांसद ने कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के संजय राउत से साहसी नेता नहीं देखा। यह बात कांग्रेस के नेताओं को नागवार गुजरी होगी, क्योंकि उनके अनुसार सबसे साहसी नेता राहुल गांधी हैं। हालांकि, कई लोग संजय राउत को उद्धव ठाकरे की पार्टी के टूटने और चुनावों में हार का जिम्मेदार मानते हैं। कुछ समय पहले, राउत को ईडी ने गिरफ्तार किया था और वे जेल में भी रहे। जेल में रहते हुए, उन्होंने एक किताब लिखी है, जिसमें कई दिलचस्प किस्से हैं।
किताब का अंग्रेजी संस्करण और विवादित दावे
यह किताब, जो मराठी में लिखी गई थी, पिछले साल प्रकाशित हुई थी। अब इसका अंग्रेजी संस्करण 'अनलाइकली पैराडाइज' के नाम से आ रहा है, जिससे चर्चा तेज हो गई है। राउत ने अपनी किताब में कई विवादित दावे किए हैं। सबसे बड़ा दावा यह है कि पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को ईडी के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने लिखा है कि धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर में अपना घर बेचा और उसके पैसे विदेश भेजे। इसके बाद ईडी ने जांच शुरू की। राउत का कहना है कि जब धनखड़ के खिलाफ मोदी सरकार के खिलाफ कुछ करने की बातें होने लगीं, तब ईडी के अधिकारियों ने उन्हें फाइल दिखाई और जांच आगे बढ़ाने की धमकी दी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया।
बाल ठाकरे और शरद पवार का योगदान
संजय राउत ने एक और दिलचस्प दावा किया है कि बाल ठाकरे और शरद पवार ने अमित शाह की मदद की थी। उन्होंने लिखा है कि जब अमित शाह की जमानत नहीं हो रही थी, तब शरद पवार ने उनकी मदद की। राउत ने बताया कि महाराष्ट्र कैडर के एक सीबीआई अधिकारी ने जमानत का विरोध किया था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने शरद पवार से मदद मांगी और उन्होंने दखल देकर अमित शाह की जमानत कराई। इसके अलावा, राउत ने गोधरा और गुजरात दंगों की जांच के दौरान नरेंद्र मोदी को गिरफ्तार करने की कोशिशों का भी जिक्र किया है।