संजय सिंह ने योगी सरकार से सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगतियों को दूर करने की मांग की
संजय सिंह का पत्र मुख्यमंत्री को
लखनऊ। आम आदमी पार्टी (AAP) के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो पत्र भेजकर राज्य की चर्चित '68,500 सहायक शिक्षक भर्ती' और '69,000 सहायक अध्यापक भर्ती' में आरक्षण संबंधी विसंगतियों और अभ्यर्थियों के शोषण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में अभ्यर्थियों के पक्ष में सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की है।
ओबीसी अभ्यर्थियों को 5% छूट
संजय सिंह ने पहले पत्र में उल्लेख किया कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 के ओबीसी और दिव्यांग अभ्यर्थी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 16 जून 2026 को सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 में से 60 अंक (40 प्रतिशत) प्राप्त करने पर उत्तीर्ण माना जाए।
सरकार पर आरोप
संजय सिंह ने कहा कि भर्ती में लगभग 23,000 पद खाली हैं, जिनमें से 9,000 ओबीसी वर्ग के हैं। इसके बावजूद, बेसिक शिक्षा विभाग ने अभ्यर्थियों को इस लाभ से वंचित रखा है, जो कि असंवैधानिक है।
संविधान का उल्लंघन
सांसद ने योगी सरकार पर आरोप लगाया कि वह दोहरे मापदंड अपना रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले ही ओबीसी अभ्यर्थियों को अन्य भर्ती परीक्षाओं में 5% छूट दी है। ऐसे में 68,500 भर्ती के अभ्यर्थियों को इस अधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट में सकारात्मक हलफनामा
दूसरे पत्र में, संजय सिंह ने 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण विसंगतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 6,800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची अभी तक अधर में है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट और सकारात्मक विधिक पक्ष रखे।
युवाओं के हक की रक्षा
संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा लंबे समय से संघर्ष कर रहा है और भाजपा सरकार संवैधानिक आदेशों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दें ताकि योग्य युवाओं को जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके।