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संभल दंगों की रिपोर्ट: जनसंख्या में भारी गिरावट और आतंकवाद का बढ़ता खतरा

संभल में 2024 में हुए दंगों की जांच रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदू जनसंख्या में भारी गिरावट आई है, जो 1947 में 45 प्रतिशत से घटकर अब केवल 15 से 20 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में आतंकवाद के बढ़ते खतरे और राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खुलासे हुए हैं।
 

संभल में दंगों की जांच रिपोर्ट का खुलासा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को हुए दंगों की जांच के लिए बनाई गई न्यायिक समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सांप्रदायिक दंगों के चलते शहर में हिंदू जनसंख्या में भारी कमी आई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी को सौंपी गई इस रिपोर्ट में उल्लेख है कि 1947 में 45 प्रतिशत हिंदू आबादी अब घटकर केवल 15 से 20 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, यह 450 पृष्ठों की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।


रिपोर्ट के लीक होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि संभल में हुई हिंसा पूर्वनियोजित और साजिश का परिणाम थी। रिपोर्ट के अनुसार, संभल अब तक 15 बड़े दंगों का सामना कर चुका है, जिनमें 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 शामिल हैं। आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में 55 प्रतिशत मुस्लिम और 45 प्रतिशत हिंदू थे, लेकिन लगातार दंगों और राजनीतिक तुष्टिकरण ने जनसंख्या संतुलन को बदल दिया है। वर्तमान में, संभल में केवल 15 प्रतिशत हिंदू बचे हैं, जो स्वतंत्रता के समय की तुलना में काफी कम है।


आतंकवाद का बढ़ता खतरा

हाल के वर्षों में, संभल विभिन्न आतंकवादी संगठनों का केंद्र बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अल-कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे समूहों ने इस क्षेत्र में अपने नेटवर्क स्थापित कर लिए हैं। अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित मौलाना आसिम उर्फ सना-उल-हक का नाम भी संभल से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, अवैध हथियारों और नशे के गिरोहों की सक्रियता की भी पुष्टि की गई है।


राजनीतिक नेताओं पर आरोप

जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 22 नवंबर 2024 को सांसद जिया-उर-रहमान बर्क के विवादास्पद भाषण ने हिंसा की नींव रखी। उन्होंने नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा कि, 'हम इस देश के मालिक हैं, नौकर-गुलाम नहीं।' इसके बाद 24 नवंबर को तुर्क और पठान समुदायों के बीच संघर्ष भड़क गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस साजिश में सांसद बर्क, विधायक पुत्र सुहैल इक़बाल और जामा मस्जिद की इंतेज़ामिया कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


बाहरी तत्वों की संलिप्तता

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दंगा करने के लिए बाहरी उपद्रवियों को बुलाया गया था। योजना के तहत हिंदुओं को निशाना बनाने की साजिश थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण बड़ी घटना टल गई। वहीं, आपसी रंजिश के चलते तुर्क और पठानों के बीच भी हिंसक टकराव हुआ।