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संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक मंदी का खतरा

संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक मंदी की चेतावनी दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो रही है। भारत की विकास दर का अनुमान भी घटाया गया है, और महंगाई में वृद्धि की संभावना जताई गई है। जानें इस संकट के संभावित प्रभावों के बारे में।
 

पश्चिम एशिया में तनाव का समाधान आवश्यक


संयुक्त राष्ट्र ने कहा, पश्चिम एशिया में तनाव का समाधान जल्द निकालना आवश्यक है


अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस स्थिति के कारण कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है, जिससे वैश्विक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि इस तनाव को शीघ्र समाप्त नहीं किया गया, तो दुनिया एक और आर्थिक मंदी का सामना कर सकती है।


भारत की विकास दर में कमी

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में भारत की विकास दर (जीडीपी) के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। यूएन के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इस संशोधन के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।


महंगाई में वृद्धि की संभावना

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नया झटका है, जिसने विकास की गति को धीमा करने के साथ-साथ महंगाई के दबाव को भी बढ़ा दिया है। 2025 में 7.5 प्रतिशत की विकास दर से 2026 में 6.4 प्रतिशत तक की गिरावट मुख्य रूप से ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत और सख्त वित्तीय स्थितियों के कारण है।


अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध

जहां एक ओर पूरी दुनिया पश्चिम एशिया की स्थिति से चिंतित है, वहीं अमेरिका और ईरान दोनों ही झुकने को तैयार नहीं हैं। इन दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और युद्ध के समाधान के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। इसके अलावा, दोनों देशों की ओर से ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जो तनाव को और बढ़ा रहे हैं।