संसद का शीतकालीन सत्र: सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की संभावना
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू
नई दिल्ली: आज से संसद का शीतकालीन सत्र आरंभ हो रहा है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया, नेशनल हेराल्ड मामले में नई एफआईआर, दिल्ली में आत्मघाती धमाके और प्रदूषण संकट को लेकर सरकार को घेरने की योजना बनाई है।
सरकार के विधेयक
सरकार ने दिवाला कानून, बीमा, सिक्योरिटीज मार्केट, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, एटॉमिक एनर्जी, जीएसटी और सुरक्षा से जुड़े सेस बिल समेत 14 महत्वपूर्ण विधेयक पास कराने का लक्ष्य रखा है।
बैठकों की संख्या
इस शीतकालीन सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें सरकार कई सुधार संबंधी विधेयक पेश करेगी। सरकार ने कहा है कि वह विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार है और संसद को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास करेगी। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हर मुद्दे पर चर्चा के लिए नियमों और परंपराओं का पालन किया जाएगा।
विपक्ष के मुद्दे
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह एसआईआर प्रक्रिया को प्रमुख मुद्दा बनाएगा। देश के 12 राज्यों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे कई दलों ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के माध्यम से गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को वोटर लिस्ट से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस की रणनीति बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सदन में सख्त रुख अपनाने का निर्देश दिया। राहुल गांधी ने बीएलओ की आत्महत्या और दिल्ली में हुए आतंकी हमले को गंभीर चूक बताते हुए इसे संसद में उठाने की बात कही।
विपक्ष वायु प्रदूषण, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर भी बहस कराने की योजना बना रहा है। दिल्ली में आतंकी हमले और राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति को लेकर भी विपक्ष सरकार पर दबाव बनाए रखने की तैयारी में है।
नेशनल सॉन्ग का मुद्दा
सरकार का एक महत्वपूर्ण एजेंडा 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा कराना है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने 1937 में गीत की कई पंक्तियां हटाकर विभाजन की नींव रखी थी। इस कारण इस मुद्दे पर भी बहस तेज होने की संभावना है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती क्योंकि यह चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही इसे लागू किया गया है। ऐसे में सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की संभावना है।